rahul gandhiनई दिल्ली, 25 फरवरी. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के एकांत मंथन से पार्टी के वरिष्ठ नेता खासे परेशान हैं. संभवत: पहली बार ऐसा हो रहा है कि पार्टी रणनीतिकारों के सभी समूहों को दरकिनार कर संगठन के बेहतर भविष्य के लिए राहुल अकेले मंथन कर रहे हैं. माना जा रहा है कि मंथन के बाद जल्द ही संगठन में व्यापक फेरबदल किया जाएगा. राजनीतिक जानकारों की माने तो राहुल गांधी की नई सोच का ही परिणाम है कि वे समूह में मंथन के बजाय सभी पक्षों से आरंभिक विचार विमर्श करने के बाद हरेक तथ्य पर अकेले मंथन कर रहे हैं.

इस मंथन को राहुल की नई पारी की आगाज से जोड़कर भी देखा जा रहा है. क्योंकि इसी वर्ष अप्रैल में पार्टी का महाधिवेशन होने वाला है और उसमें राहुल गांधी को नई जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. जानकारों की मानें तो राहुल गांधी के इस नए प्रयोग से सबसे ज्यादा बेचैन हवा-हवाई नेता हैं जो सिर्फ दिखावे के लिए अपने आप को विभिन्न राज्यों, जिलों व क्षेत्रों के सबसे तकतवर नेता के रूप पेश करते रहे हैं. जबकि सच्चाई यह है कि वे सिर्फ गणेश परिक्रमा को ही अपनी राजनीति का आधार मानते हैं. इसलिए प्रेक्षक मान रहे हैं कि मंथन के बाद संभव है कि राहुल उक्त मंडली के प्रभाव से न सिर्फ अपने आप को बाहर करेंगे, बल्कि संगठन को भी ऐसे नेताओं के प्रभाव से बाहर करेंगे. जानकार मान रहे हैं कि ऐसा नहीं है कि अचानक ही संगठन से सभी वरिष्ठों को बाहर का रास्ता दिखाया दिया जाएगा, बल्कि ज्यादा उम्मीद है कि कारगर वरिष्ठ रणनीतिकारों को सलाहकार की अहम भूमिका में रखकर बुजुर्गो की सरपरस्ती में युवाओं की नई टीम के साथ राहुल गांधी नई चुनौतियों से निपटने के लिए मैदान में उतरेंगे. प्रेक्षक मान रहे हैं कि यदि वरिष्ठों के बेहतर मार्गदर्शन के साथ युवाओं को प्रथम पंक्ति में खड़ा करके संगठन को मजबूत करने का प्रयास किया गया, तो निश्चित ही बेहतर परिणाम की उम्मीद रहेगी. बहरहाल, संगठन की बेहतरी के संदर्भ में राहुल गांधी का मंथन व मनन अभी जारी है, इसलिए उम्मीद की जा रही है कि कुछ नया सामने जरूर आएगा.

प्रवेश कुमार मिश्र

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