मुंबई. नवंबर 2014 से शुरू हुए तेल वर्ष में अब तक भारत का रिफाइंड खाद्य तेल (आरबीडी) आयात घटकर पांच वर्षों के निचले स्तर पर आ गया है. इसकी वजह स्थानीय इकाइयों का रिफाइनरी मार्जिन सुधरना है. इस क्षेत्र की शीर्ष संस्था सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) के आंकड़ों के मुताबिक नवंबर, 2014 से मार्च, 2015 के दौरान रिफाइंड तेल का आयात 63 फीसदी गिरकर 3,03,066 टन रहा है, जो पिछले साल की इसी अवधि में 8,17,615 टन था. इस तरह चालू तेल वर्ष के पहले पांच महीनों के दौरान कुल वनस्पति तेल आयात में रिफाइंड तेल का हिस्सा घटकर महज 6 फीसदी रह गया, जो पिछले साल की इसी अवधि में 19 फीसदी था.

एसईए के कार्यकारी निदेशक बी वी मेहता ने कहा, आरबीडी और कच्चे पाम तेल (सीपीओ) की कीमतों में अंतर घट रहा है. अक्टूबर 2014 से सीपीओ के विश्व के दो सबसे उत्पादक देशों मलेशिया और इंडोनेशिया ने निर्यात पर शुल्क खत्म कर दिया है. इस समय सीपीओ का आयात आरबीडी की तुलना में सस्ता है. भारतीय रिफाइनर सीपीओ का आयात आरबीडी से 10 डॉलर प्रति टन कम पर कर रहे थे. निर्यात शुल्क शून्य होने से आरबीडी की कीमत 20 डॉलर प्रति टन बढ़ी है.

वनस्पति तेल की सबसे बड़ी रिफाइनिंग कंपनियों में से एक के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, सीपीओ का सस्ता आयात पेराई और रिफाइनिंग उद्योग को प्रभावित कर रहा है. सरकार को तत्काल आरबीडी और सीपीओ पर आयात शुल्क बढ़ाना चाहिए, ताकि खाद्य तेल की कीमतें थोड़ी बढ़ सकें. अगर खाद्य तेल की कीमतें कमजोर बनी रहीं तो घरेलू तिलहन पेराई करने वाले उद्योग और रिफाइनर वित्तीय लाभ नहीं होने के कारण घरेलू तिलहन का उपयोग नहीं करेंगे. खरीफ सीजन में तिलहन की बुआई शुरू होने जा रही है, इसलिए सरकार को किसानों को तिलहन का रकबा बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए. इसके लिए शुल्क में अंतर को वर्तमान 7.5 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी किया जाना चाहिए.

केंद्र सरकार ने दिसंबर 2014 में सीपीओ पर कर 2.5 फीसदी से बढ़ाकर 7.5 फीसदी और रिफाइंड तेल पर 10 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी किया था, जिससे शुल्क में अंतर 7.5 फीसदी हो गया. किसानों और स्टॉकिस्टों का अनुमान है कि कमजोर कीमतों के कारण सोयाबीन का बिना बिका हुआ स्टॉक करीब 15 लाख टन है, जो कुल उत्पादन का करीब 15 फीसदी है. इससे किसान इस खरीफ सीजन में और ज्यादा आमदनी वाली फसलों की ओर रुख कर सकते हैं. वर्ष 2015 के दौरान मलेशिया और इंडोनेशिया में पाम तेल का उत्पादन क्रमश: 197 लाख टन और 315 लाख टन होने का अनुमान है, जो उनकी खपत का 10 गुना है. गोदरेज इंटरनैशनल के निदेेशक दोराब मिस्त्री के मुताबिक इस साल हमारा वनस्पति तेल आयात 126 लाख टन की नई ऊंचाई पर पहुंच सकता है, जबकि पिछले साल आयात 118 लाख टन रहा था.

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