मयप्रदेश की शिक्षण संस्थाओं में रेगिंग के अपराधों में अत्यधिक 82 प्रतिशत की वृद्धि हो जाना यह दर्शा रहा है कि अब शिक्षण संस्थाएं अपराध के अड्डे बन चुके हैं. रेगिंग में केवल नये छात्रों को परेशान ही नहीं किया जाता बल्कि उनके साथ आपराधिक मारपीट और लूट की जाती है.

जहां रेगिंग इस तेजी से बढ़ रही है उससे सहज ही यह अंदाजा हो जाता है कि उन संस्थाओं में पढ़ाई कितनी और क्या होती होगी.जब रेगिंग मामूली सी घटनाओं से बढ़कर अपराध के स्तर पर आ गयी हैं तब इन्हें केवल शिक्षण संस्थाओं में अनुशासनहीनता का मामला नहीं मानना चाहिए जिसे शिक्षण संस्थाओं का प्रशासन देखे.

इनकी रोकथाम भी उसी समय हो सकती है जब इन्हें अपराध और अपराधी की तरह इन पर पुलिस में एफ.आई.आर. दर्ज की जाये और पुलिस उसकी अपराध की दृष्टि से विवेचना कर उन्हें अदालतों में पेश करे और उन्हें अदालतों में सजा हो. केवल शिक्षण संस्थाओं में अनुशासन की कार्यवाही से कोई असर नहीं हुआ बल्कि रेगिंग में 82 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है.

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