केन्द्रीय बजट में वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने रेडीमेड कपड़ों पर 2 प्रतिशत उत्पाद शुल्क लगाया और इनके भावों में पांच प्रतिशत की वृद्धि हो गयी. भारत के निर्यात व्यापार में रेडीमेड कपड़ों के निर्यात का भी बहुत बड़ा वैश्विक बाजार व व्यापार में हिस्सेदारी है. लेकिन भारत इस निर्यात में उससे काफी छोटे व कम विकसित देशों बंगलादेश व वियतनाम से मात खा रहा है.

रेडीमेड कपड़ों का उद्योग बंगलादेश में प्रमुख निर्यात के साथ-साथ देश का सबसे बड़ा कारखाना उत्पाद व गृह उद्योग भी बन गया है. विश्व बाजार में बंगलादेश के गारमेंट अपना नाम व साख बना चुका है. भारत में इस उद्योग के लिये विपुल अवसर है लेकिन उसे बजाय प्रोत्साहन देने के उस पर टैक्स लगाकर उसे महंगा कर दिया जाता है.

भारत में रेडीमेड कपड़ा उद्योग के दो प्रकार हैं- एक उसका ब्रांड नाम पर औद्योगिक स्वरूप का है जो 1,50,000 करोड़ रुपयों का है जबकि असंगठित उद्योग जो छोटे व गृह उद्योग के रूप में चलता है वह संगठित उद्योग से दुगना तीन लाख करोड़ रुपयों का है. हमारा निर्यात एक ओर तो दूसरे प्रतिस्पर्धी मुल्कों से महंगा हो जाता है. इससे भी ज्यादा बड़ी रुकावट इससे हो रही है कि यूरोप व अमेरिका व अन्य प्रमुख देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफ.टी.ए.) में देरी हो रही है.

लेकिन अब यह सुखद समाचार है कि यूरोपीयन यूनियन के देशों के संघ ने 2017-19 तक अगले तीन वर्षों के लिए सामान्य रूप से टैरिफ वरीयतों की घोषणा कर दी है. चीन को सूची से हटा दिया है, जिससे भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजार में वरीयता व बढ़त मिलेगी. भारत के तैयार व क्षेत्र के लिए योजना है कि यूरोपीय यूनियन के जनरल टैरिफ सस्पेन्शन हमारे व्यापार को बढ़ावा मिले.

यूरोपीय संघ के फैसले से व को वरीयता मिलती है. भारत को तीन सालों के लिये यूरोपीय देशों को निर्यात पर 20 प्रतिशत टैरिफ वरीयता प्राप्त हुई है.
भारत के कपड़ा उद्योग संगठन (ए.ई.पी.सी.) के अध्यक्ष श्री अशोक रजनी ने कहा कि हमारा प्रयास अब यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौता करना है.

भारत सरकार इस निर्यात व्यापार को बढ़ाने के लिए आस्ट्रेलिया, रूस एवं रूस से स्वतंत्र हुए अन्य राष्ट्रों में कपड़ा व्यापार द्विपक्षीय समझौते से करने का प्रयास कर रहा है. 2014-15 में भारत का कपड़ा निर्यात 42 अरब डालर का था जबकि 15-16 में लक्ष्य 47.5 अरब डालर का था वह गिरकर 32 अरब डालर का रह गया.

इसमें ज्यादातर भाग रूई व धागे का था. भारत में कपड़ा उद्योग तकनीक व क्वालिटी उत्तम होता है पर प्रतिस्पर्धा में मूल्य का भी बहुत असर पड़ता है.
सरकार को भारत का रेडीमेड निर्यात को बढ़ाने के लिए उसे देश का प्रमुख रोजगार व्यापार बनाने का अवसर है. व्यापार जगत का कहना है कि सरकार इस उद्योग में टैक्स से क्यों कमाई करना चाहती है जबकि उससे ज्यादा इसके निर्यात से हो सकती है.

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