रिजर्व बैंक आफ इंडिया ने अगली मौद्रिक समीक्षा से पहले ही रेपो रेट में एक और अतिरिक्त रेट घटाने की सुविधा दी है. गत जनवरी में रेपो रेट 0.25 बेसिक पाइंट घटाया गया था और फिर 4 मार्च को एक बार फिर रेपो रेट में 0.25 बेसिक पाइंट की कमी कर उसे 7.5 प्रतिशत पर ले आये है. रिवर्स रेपो रेट वर्तमान प्रचलित दर पर 6.5 प्रतिशत और सी.आर.आर. केश रिजर्व रेशो भी यथावत 4 प्रतिशत पर ही रहेगा. इन दोनों में कोई परिवर्तन नहीं किये गये है.

रिजर्व बैंक के गवर्नर श्री रघुराम राजन ने कहा कि रिजर्व बैंक ने बीच में ही यह एक और रेट कटौती विकास दर की वृद्धि को लक्ष्य कर की है. आर्थिक व व्यापार जगत ने इस ‘मिडटर्मÓ राहत का स्वागत किया है. इससे सैंसेक्स व निफ्टी के साथ शेयर बाजार के कारोबार में उछाल आया है.

बैंक की ऐसी योजना और आंकलन है कि महंगाई को 2 से 6 प्रतिशत के बीच रखने के प्रयास होंगे. और 2019 तक इसे 4 प्रतिशत तक करने का
लक्ष्य है.

केंद्रीय बजट में निवेश बढ़ाने की नीतियों को अपनाया गया है. उसमें एक बड़ा कदम भूमि अधिग्रहण को भी माना गया. मोदी सरकार की पूववर्ती कांग्रेस नेतृत्व की यू.पी.ए. सरकार ने भी निवेशमुखी नीति अपनायी थी और उन्होंने ही पहली बार भूमि अधिग्रहण का कानून बनाया था. उसी कानून मेें मोदी सरकार ने कुछ संशोधन किये हैं. इस पर मतभेद व विरोध तो उभरा है, लेकिन मूल मुद्दा भूमि अधिग्रहण है इस पर कोई मतभेद व विरोध नहीं है.

रिजर्व बैंक भी सरकार की निवेश बढ़ाने की नीति के अनुरूप ही बढ़ रहा है और रेपो रेट में दूसरी बीच टर्म में एक और बढ़ोतरी की है.

रिजर्व बैंक कमर्शियल बैंकों की वित्तीय स्थिति से काफी चिंतित है. कुछ समय पूर्व केन्द्र सरकार ने राष्टï्रीय बैंकों को कारोबार के लिये बहुत बड़े पैमाने पर बजट से केपीटल सपोर्ट दिया था. बैंकों की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि महंगाई दौर खासकर उद्योग-व्यापार जगत में विकास दर व उनके धंधे में इतनी गिरावट आई कि उद्योगों द्वारा लिये भारी-भरकम कर्जों की समयबद्ध वापसी नहीं हो पायी और वसूली की एक लम्बी-चौड़ी प्रक्रिया होती है जिसमें बैंकों की पून्जी फंसी पड़ी रहती है और उनका मुद्राकोष कम होने से उनके आर्थिक कारोबार पर बहुत विपरीत प्रभाव पड़ता है. इसे बैंक शब्दावली में एन.पी.ए. (नान परफारमिंग एसेट) कहा जाता है. निजी हवाई सेवा किंगफिशर के भारी घाटे के कारण कई बैंकों का भी रुपया फंस गया है. यूनाइटेड बैंक तो दिवालिये की कगार पर आ गया था. रिजर्व बैंक गवर्नर श्री राजन ने बैंकों से कहा है कि वे धन प्राप्त करने के लिए केवल सरकारी वित्तीय सपोर्ट पर ही निर्भर न रहें और वैकल्पिक स्रोतों को बनायें.

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