prabhuनयी दिल्ली,  सरकार ने अगले वित्त वर्ष से रेल बजट को आम बजट में मिलाने तथा बजट पारित कराने की संपूर्ण प्रक्रिया 31 मार्च से पहले पूरी करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इससे रेलवे के लिए अलग बजट पेश करने की 92 वर्ष से चल रही परंपरा अब इतिहास बन जायेगी।

सरकार ने बजट में योजना और गैर योजना खर्च को अलग- अलग रखने के प्रावधान को भी समाप्त करने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में यहां हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इन प्रस्तावों को मंजूरी दी गयी।

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी देते हुए कहा कि सरकार का जैसा राजकोषीय अनुशासन और दिशा है, रेल बजट भी उसी का अंग होना चाहिये। यह देखते हुए आने वाले वर्ष से रेल बजट आम बजट में समाहित कर दिया जायेगा।

उन्होंने कहा कि आम बजट का अंग होने के बावजूद रेलवे से जुड़े प्रस्तावों को एक अलग विनियोग विधेयक में पेश किया जायेगा। रेलवे की अलग पहचान को पूरी तरह से बरकरार रखा जायेगा। सरकार सुनिश्चित करेगी कि रेलवे के व्यय की स्वायत्तता बनी रहे। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि संसद में रेलवे के प्रस्तावों पर अलग से चर्चा हो और संसदीय जवाबदेही बनी रहे। उन्होंने कहा कि रेलवे को पूंजीगत व्यय- 2.27 लाख करोड़ रुपये पर जो लाभांश देना होता था, वह अब नहीं देना होगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि 1924 में जब अलग रेल बजट की परंपरा शुरू हुई थी तब रेलवे का खर्च सरकार के बाकी सकल व्यय से बहुत अधिक होता था। बाद में आम बजट का आकार बढ़ता गया और अाज कई मंत्रालयों जैसे रक्षा, राजमार्ग, ग्रामीण विकास आदि का बजट रेलवे से कहीं अधिक हो गया और वे आम बजट का हिस्सा बने रहे। उन्होंने कहा कि नीति आयोग के सदस्य डॉ. विवेक देवराय की कमेटी ने सिफारिश की थी कि रेल बजट का आम बजट में विलय कर दिया जाना चाहिए। सिर्फ परंपरा के आधार पर ही रेल बजट को अलग से पेश किये जाने का कोई औचित्य नहीं है।

श्री जेटली ने बताया कि सरकार सैद्धांतिक रूप से इस पक्ष में है कि अगले वित्त वर्ष से बजट की पूरी प्रक्रिया मई के बजाय 31 मार्च से पहले पूरी कर ली जाये ताकि बजट प्रावधानों को एक अप्रैल से लागू किया जा सके। मौजूदा प्रक्रिया में बजट मई में पारित हो पाता है और इसके प्रावधान प्रभावी रूप से सितम्बर के महीने से ही लागू हो पाते हैं।

उन्होंने कहा कि बजट प्रक्रिया को 31 मार्च से पहले पूरा करने के लिए सरकार संसद का बजट सत्र पहले बुलाना चाहती है लेकिन अगले वर्ष की शुरूआत में कुछ राज्यों में विधानसभा चुनावों को देखते हुए इसकी तिथि का निर्णय चुनाव कार्यक्रम के आधार पर लिया जायेगा।

संसद का बजट आमतौर पर फरवरी के अंतिम सप्ताह में शुरू होता है और उसी माह पहले रेल बजट और उसके बाद आम बजट पेश किया जाता है। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष एक अप्रैल की बजाय एक जनवरी से करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

श्री जेटली ने बताया कि मंत्रिमंडल ने बजट में योजना व्यय और गैर योजना व्यय का अलग-अलग प्रावधान नहीं करने का भी निर्णय लिया है।

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