वर्ष 2015-16 के रेल बजट में यात्री किराये या मालभाड़े में कोई वृद्धि नहीं की गयी. लेकिन इसमें सुविधाओं का विस्तार व संरचना विकास के लिये केंद्रित हुआ है. इसमें फिलहाल किसी नई ट्रेन की घोषणा नहीं हुयी है. लेकिन यह कह दिया गया है कि इस प्रश्न पर रेल मंत्रालय व रेलवे बोर्ड की रेलवे ट्रेक पर खाली जगह बनाने के लिए अध्ययन कर रहा है और उसके आते ही इस बजट सत्र से नई ट्रेनों की घोषणा कर दी जायेगी.
इसे परंपरागत रूप में तो रेल बजट नहीं कहना चाहिए क्योंकि स्वयं रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु ने कहा है कि रेलवे बजट वास्तव में नीतिगत दस्तावेज होना चाहिए और उनका यह पहला बजट और मोदी सरकार का दूसरा रेलव बजट उसी नयी परिपाटी का लगता है. यह भी संभावना व्यक्त की जा रही है कि संभवत: यह आखरी रेल बजट हो. इसके बाद जैसे सामान्य (जनरल) बजट में सभी विभागों के बजट का एकीकृत रूप में समावेश रहता है. उसी तरह रेल बजट भी अलग से न होकर जनरल बजट में ही रखा जायेगा.

इस रेल बजट में नये प्रोजेक्ट व नयी ट्रेनों की घोषणा भी बहुत ही वाजिब लगती है. अभी तक हर रेलव बजट में किराया भाड़ा और नयी ट्रेनों का उल्लेख ही वास्तव में रेल बजट माना जाता था. और लोगों की उत्सुकता भी इसी पर होती थी. नतीजा यह हुआ कि हर रेल मंत्री नयी-नयी योजनाओं की घोषणा तो करता चला गया लेकिन उनमें अब तक ऐसी 400 योजनाएं हो गयी कि जन पर काम ही पूरा नहीं हुआ. हैरानी इस बात की भी है कि 4-5 ऐसी योजनाएं भी है जो 30 साल पहले घोषित की गयी थी और उन पर जरा सा भी काम शुरू तक नहीं हुआ. इसलिए श्री प्रभु का यह कदम सही है कि हर मंत्री अपनी-अपनी योजनाएं घोषित करते चले जाए और आने वाले मंत्री उन्हें ठंडे बस्ते में डालते जाए. साथ ही इस बजट में रेलों की संरचना व आय बढ़ाने की नीति बनाई गई है. किराया भाड़ा ही एकमात्र आमदनी का जरिया बने रहेंगे तो इसमें किराये की मुद्रास्फीती आ जायेगी. इस नये बजट में 40,000 लाख करोड़ रुपये के केंद्रीय बजट में सपोर्ट-सहायता के रूप में मिलेंगे, 17-18 प्रतिशत बजट का भाग रेलवे के खुद के संसाधन से और बाकी देशी-विदेशी प्रत्यक्ष निवेश और योजनाओं के पी.पी.पी. माडल से प्राप्त कर सबसे पहले रेलवे का आर्थिक और वित्तीय स्वास्थ्य सुधारा जायेगा. पिछली लम्बित योजनाओं को पूरा किया जायेगा. श्री प्रभु का कहना है कि रेलवे लाइनों पर यात्री गाडिय़ों और मालगाडिय़ों की संख्या इतनी ज्यादा हो चुकी है कि और ज्यादा बढ़ाने के लिये रेलवे ट्रेक पर समय नहीं है. रेलवे बोर्ड के अधिकारी इसका आंकलन कर रहे हैं कि रेलवे ट्रेक पर गाडिय़ां बढ़ाने के लिये समय किस तरह निकाला जाए अन्यथा यह होगा कि जैसे सड़कों पर गाडिय़ों की भरमार और किसी कारण निकासी रुक जाने से ”जामÓÓ लग जाता है उसी तरह गाडिय़ों की भरमार जब कभी भी किसी एक यात्री या मालगाड़ी में कोई तकनीकी खराबी या दुर्घटना होने पर रेलवे लाइनों पर कई किलोमीटर तक यात्री गाड़ी व मालगाडिय़ों का ऐसा ”जामÓÓ लगेगा कि उसे क्लियर होने में कई दिन लग जायेंगे. ऐसी स्थिति में दूसरे सेक्शनों से गाडिय़ां डाईवर्ट करने से दूसरा सेक्शन भी गड़बड़ा जाता है. इसलिए इस बजट में इस बात पर जोर दिया गया है कि जहां सिंगल लाइन है उसे डबल किया जाए और लांग रूट पर जहां डबल लाइनें हैं वहां तीन या चार लाइनों का ट्रेक बनाया जाए.

श्री प्रभु रेल बजट में लीक से तो हटे हैं लेकिन वे व्यवहारिक होकर रेलवे व्यवस्था को पटरी पर जरूर ला रहे हैं. वर्तमान में सैकड़ों योजनाओं के लम्बित रहने व यात्री व मालगाडिय़ों में ट्रेक की क्षमता से ज्यादा हो जाने से रेल व्यवस्था ही पटरी से उतर गयी है.

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