जरूरतमंदों की संख्या के लिहाज से कम हैं रैन बसेरे

नवभारत न्यूज भोपाल,

राजधानी में पिछले कुछ दिनों से ठंड काफी बढ़ गई है, जिसका सबसे ज्यादा असर गरीबों और असहाय लोग जो कि फुटपाथ पर रात गुजारने को मजबूर हैं, उनको देखने पर महसूस होता है. शहर के विभिन्न इलाकों में ठंड से कांपते हुये लोग देखने को मिल जाते हैं और जहां कहीं अलाव जलता हुआ दिखता है, वहां पर उस अलाव को चारों तरफ से घेरे लोग आग तापते हुये नजर आते हैं.

ज्ञात हो कि प्रत्येक 1 लाख की आबादी पर 500 लोगों की क्षमता वाला रैन बसेरा होना चाहिये. शहर में वैसे तो कई स्थानों पर रैन बसेरे हैं पर क्षमता के लिहाज से कम हैं. वहीं दूसरी ओर कोलार क्षेत्र में रैन बसेरा है ही नहीं.गौरतलब हो कि बुधवार से ठंड बढ़ गई है और तापमान में गिरावट भी बहुत आई है. मौसम विभाग का कहना है कि अगले 3-4 दिनों में तापमान और भी गिर सकता है और ठंड बढ़ सकती है.

शहर में 15 स्थानों पर रैन बसेरे चल रहे हैं. जिनमें गद्दे-कम्बल की पर्याप्त व्यवस्था की गई है साथ ही अतिरिक्त व्यवस्था भी है जिससे कि अधिक लोगों के रैन बसेरों में आने पर गद्दे-कम्बल की कमी न हो. इसके साथ ही अलाव जलाने, पीने के पानी, लाइट की व्यवस्था की गई है और कई रैन बसेरों में टीवी का इंतजाम भी किया गया है.      -विनोद कुमार शुक्लडिप्टी कमिश्नरनगर निगम भोपाल

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