रूसी स्टार्टअप कंपनी द्वारा तैयार रोबॉट वीरा उन लोगों के इंटरव्यू करेगी जो जानी मानी कंपनियों में नौकरियां करना चाह रहे हैं. वीरा लॉरेल, आइका और पेप्सीको जैसी कंपनियों के लिये योग्य उम्मीदवारों का चयन कर रही है.

बड़ी कंपनियों ने जब यह देखा कि रिक्रूटमेंट के दौरान जॉब में जो लोग नहीं इंटरेस्टेड हैं वे भी आ जाते हैं. उन पर खर्च किया गया टाइम और पैसा व्यर्थ चला जाता है.

इस रोबॉट वीरा को एचआर यानी ह्यूमन रिसोर्स डिपार्टमेंट से ताल्लुक रखने वाले अलेग्जेंडर यूराक्सिन और व्लादिमिर शेजनिकोव ने मिलकर तैयार किया है. ये दोनों रूस के सेंट पीटर्सबर्ग स्थित स्टाफ्रे स्टार्टअप के को-फाउंडर्स हैं.

इनके मुताबिक, एचआर का काम काफी हद तक रोबॉटिक है और यहीं से यह नया रोबॉट तैयार करने का आइडिया आया. यह सफल भी रहा इसका प्रमाण यही है कि स्टाफ्रे के पास अभी तकरीबन 300 क्लाइंट्स हैं.

वीरा को बनाने वालों का कहना है कि प्रोग्रामर्स ने रोबॉट वीरा को टीवी, विकीपीडिया और जॉब लिस्टिंग्स की भाषा और स्पीचेज की मदद से 13 बिलियन उदाहरणों से ट्रेनिंग दी गई है. इसके चलते यह रोबॉट बेहतरीन ढंग से बातचीत कर सकती है.

अब इसे गुस्सा, निराशा सरीखे भावों को समझने की ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि यह अपना काम और बेहतर तरीके से कर सके. वैसे भी यह रोबॉट ऐसे वक्त में आई है जब जॉब देने वाली ज्यादातर कंपनियां आर्टिफिशल इंटेलिजेंस से जुड़ रही हैं या जुडऩे की इच्छुक दिख रही हैं. हायरिंग से लेकर फायरिंग तक के डिसीजन में यह पहल एक अहम रोल निभाने वाली है.

फिलहाल रोबॉट वीरा सर्विस डिपार्टमेंट से जुड़े क्लर्क, वेटर्स, कंस्ट्रक्शन वर्कर्स आदि को हायर करती है. इससे कंपनी को हायर करने में समय की बचत और रिक्रूटमेंट खर्च की लागत में भी राहत मिल जाती है.

इस रोबॉट का सॉफ्टवेयर विडियो या वॉयस कॉल्स के जरिए एक वक्त में एक साथ सैकड़ों लोगों का इंटरव्यू ले सकता है. रोबॉट वीरा की मदद से रिक्रूटमेंट प्रोसेस में आने वाला कुल खर्च घटकर लगभग एक तिहाई रह जाता है.

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