pic1वॉशिंगटन,  पठानकोट में एयरफोर्स के बेस पर आतंकी हमले के बाद अमेरिका की शुरुआती प्रतिक्रिया बेमन से दी गई प्रतीत हो रही थी। दूसरी तरफ कुछ हलकों में महसूस किया जा रहा है कि यूएस स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता ने पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन पर अमेरिकी ऑपरेशन का हवाला देकर दिलचस्प संकेत दिए हैं।

आतंकी हमले को लेकर सात जनवरी से लगातार पूछे जा रहे सवालों का जवाब देते हुए यूएस स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता जॉर्न किर्बी ने कहा, च्हमलोग चाहते हैं कि 26/11 को मुंबई में आतंकी हमले जिन्होंने किए उन्हें सजा मिले। उन्हें इंसाफ के दायरे में लाया जाना चाहिए। हम जानते हैं कि इसमें लंबा समय लग सकता है। इंसाफ दिलाने के लिए ओसामा बिन लादेन में हमें भयानक रूप से लंबा वक्त लगा था लेकिन हमने किया। तो समझना चाहिए कि कठिन हो सकता है। किर्बी से पूछा गया था कि मुंबई हमले के बाद पाकिस्तान को अमेरिका ने इतना लंबा वक्त दिया।

अमेरिका ने पाकिस्तान को समय सीमा तो नहीं दी है लेकिन मीडिया से हुई बातचीत में इसका अर्थ यह भी निकाला जा रहा है कि अमेरिका ने जिस तरह से अंतत: पाकिस्तान में घुसकर ओसमा बिन लादेन का निपटारा किया था वह विकल्प भी खुला है। पाकिस्तानी मिलिटरी पर भरोसा करना मुश्किल है क्योंकि अमेरिका में वल्र्ड ट्रेड सेंटर पर हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान के ऐबटाबाद में रह रहा था।

ओसामा के खिलाफ पाकिस्तान में अमेरिका ने गुप्त ऑपरेशन चलाया था और अल-कायदा नेता को खत्म कर दिया था। जॉन किर्बी से पूछा गया कि क्या अमेरिका पाकिस्तान से उम्मीद करता है कि पठानकोट में हमले के जिम्मेदार लोगों पर ठोस कार्रवाई करेगा क्योंकि 9/11 के हमले की भी पाकिस्तान ने कड़ी निंदा की थी और बिन लादेन पाक मिलिटरी अकेडमी में रह रहा था।

क्या पाकिस्तान की पठानकोट पर निंदा को इससे अलग देखना चाहिए? इस सवाल के जवाब में किर्बी ने कहा, च्अमेरिका निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की उम्मीद करता है. पाकिस्तानी जमीन से भारत में हो रहे आतंकी हमले पर पाक में गुप्त ऑपरेशन चलाने के मामले में भारत की अपनी मजबूरियां हैं। अमेरिका ने जिस सैन्य शक्ति और क्षमता के साथ बदला लिया उसकी तुलना भारत से नहीं की जा सकती लेकिन सवालों के जवाब में अमेरिका द्वारा उस ऑपरेशन का हवाला दिया जाना मायने रखता है।