नयी दिल्ली,

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए उस पर देश का विभाजन करने का आरोप लगाया आैर देश में लोकतंत्र स्थापित करने के उसके दावे को पूरी तरह गलत ठहराते हुए कहा कि उसने देशहित नहीं बल्कि राजनीतिक स्वार्थ को ध्यान में रखकर फैसले किये जिसका खामियाजा देश आज तक भुगत रहा है।

कांग्रेस और वाम दलों के भारी शोरशराबे और नारेबाजी के बीच श्री मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर कल हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस ने देशहित में नहीं बल्कि राजनीतिक स्वार्थ को ध्यान में रखकर फैसले किये जिनका खामियाजा देश आज तक भुगत रहा है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस काे यह अहंकार है कि देश काे लोकतंत्र प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू आैर उसने दिया है जबकि वास्तविकता यह है कि भारत में लोकतंत्र हजारों साल से है। सदन में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन के कल के भाषण के संदर्भ में उन्होंने कहा ,‘कांग्रस हमें लोकतंत्र का पाठ न पढ़ाये। ’

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि कांग्रेस नेताओं को लगता है कि भारत का जन्म 15 अगस्त 1947 को हुआ और लोकतंत्र आया । उन्होंने कहा कि लिच्छवी साम्राज्य और बौद्धकाल में भी लोकतंत्र की गूंज थी।

उन्होंने श्री खड़गे को याद दिलाया उनके गृह राज्य कर्नाटक से ताल्लुक रखने वाले जगतगुरू विश्वेश्वर ने 12वीं शताब्दी में ऐसी व्यवस्था की थी जिनमें सबकुछ लोकतांत्रिक ढंग से होता था और महिलाओं की सदस्यता भी अनिवार्य थी। ढाई हजार वर्ष पहले गणराज्य की व्यवस्था थी जिसमें सहमति और असहमति का सम्मान होता था। इसतरह लाेकतंत्र हमारी रगों और परंपराओं में है।

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