नयी दिल्ली,

उच्चतम न्यायालय ने लोकायुक्त या उपलोकायुक्त की नियुक्तियों से जुड़े एक मामले में केंद्र शासित प्रदेश पुड्डुचेरी और 12 राज्यों के मुख्य सचिवों से दो सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है।

न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति आर भानुमति की पीठ ने भारतीय जनता पार्टी के नेता अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर और तमिलनाडु सहित 12 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेश पुड्डुचेरी के मुख्य सचिवों से दो सप्ताह के भीतर यह जवाब देने को कहा है कि उनके यहां अभी तक लोकायुक्त या उपलोकायुक्त की नियुक्तियां क्यों नहीं हुई?

सुनवाई शुरू होते ही न्यायालय ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील गोपाल शंकरनारायणन से पूछा कि किस राज्य ने लोकायुक्त या उपलोकायुक्त की नियुक्ति की है और किसने नहीं, हालांकि उनके पास इसका कोई जवाब नहीं था।

तब न्यायमूर्ति गोगोई ने खुद एक सूची निकाली और उसमें दर्ज उन राज्यों के नाम पढ़ने शुरू कर दिये, जिन्होंने लोकायुक्त या उपलोकायुक्त की नियुक्ति नहीं की है।

इस सूची में दिल्ली, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर और तमिलनाडु के अलावा अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, पुड्डुचेरी, तेलंगाना, उत्तराखंड और त्रिपुरा शामिल हैं।

पीठ ने इन राज्यों के मुख्य सचिवों को दो सप्ताह के भीतर हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने इन राज्यों से पूछा है कि आखिर इन राज्यों ने अभी तक लोकायुक्त या उपलोकायुक्तों की नियुक्ति क्यों नहीं की है?

याचिकाकर्ता का कहना है कि लोकपाल एवं लोकायुक्त कानून, 2013 को एक जनवरी 2014 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गयी और यह 16 जनवरी 2014 से अमल में आ गया, इसके बावजूद इतने वर्षों से न तो केंद्र सरकार ने लोकपाल नियुक्त किया है, न ही विभिन्न राज्यों में लोकायुक्त या उपलोकायुक्त नियुक्त किये गये हैं।

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