spo3नई दिल्ली,  भारतीय खेलों में प्रो लीग को लाने में वर्ष 2015 क्रांतिकारी वर्ष साबित हुआ और इस साल में भारत को दुनियाभर में विभिन्न खेलों की लीग का सबसे बड़ा बाजार बना दिया.

2015 में हॉकी इंडिया लीग, क्रिकेट की आईपीएल, कबड्डी की प्रो कबड्डी लीग, टेनिस की चैंपियंस लीग और इंटरनेशनल प्रीमियर टेनिस लीग, फुटबॉल की इंडियन सुपर लीग और कुश्ती की पहली प्रो रेसलिंग लीग का आयोजन हुआ. हॉकी, क्रिकेट, कबड्डी, टेनिस और फुटबॉल की लीग का आयोजन इससे पहले भी हो चुका था जबकि कुश्ती में लीग की पहली शुरूआत धमाकेदार रही. वर्ष 2013 में पहली बार आयोजित हुई इंडियन बैडमिंटन लीग का 2014 और 2015 में आयोजन नहीं हो सका लेकिन इस साल भारतीय बैडमिंटन संघ ने इसे 2016 के शुरू में दो जनवरी से खुद कराने का फैसला किया है और इसे प्रीमियर बैडमिंटन लीग का नाम दे दिया है.

प्रो कबड्डी लीग ने इस पारंपरिक खेल की लगातार दूसरे वर्ष कामयाबी से उत्साहित होकर अगले साल इसे दो बार कराने की घोषणा की है. टेबल टेनिस ने भी 2016 में अपनी लीग शुरू करने का ऐलान किया है. नयी लीगों के चलते नये वर्ष में कुल दस लीगों का मजा देखने को मिलेगा.

दुनिया के किसी भी देश में इतनी लीग का आयोजन एक साल में देखने में नहीं आ रहा है चाहे वह खेलों की सुपर पावर क्यों न हो. दरअसल खेलों के मामले में भारत वैश्विक ब्रांड की नजर में एक बहुत बड़ा बाजार बन चुका है. भारत को ओलंपिक स्तर पर चाहे बड़ी कामयाबी न मिल पा रही हो लेकिन कॉरपोरेट और ब्रांड लीग के लिये पैसा फेंकने को तैयार है.

क्रिकेट की आईपीएल का उदाहरण सबके सामने है जिसमें टाइटल स्पांसर छिना और भ्रष्टाचार के चलते चेन्नई और राजस्थान की दो टीमों को निलंबित किया गया. लेकिन चीन की वीवो मोबाइल कंपनी आईपीएल की नयी टाइटल स्पांसर बन गई जबकि राजकोट और पुणे दो नयी टीमों के रूप में आईपीएल में शामिल हो गया.

बैडमिंटन लीग आयोजकों और प्रायोजकों के बीच हितों के टकराव के चलते दो साल आयोजित नहीं हो पाई लेकिन भारतीय बैडमिंटन संघ ने इसे खुद ही कराने का फैसला कर लिया है. मामला अदालत में भी गया लेकिन वहां से हरी झंडी मिलने के बाद बैडमिंटन लीग अब पीबीएल के रूप में दो जनवरी से शुरू हो रही है जिसमें दुनिया के तमाम बड़े बैडमिंटन सितारे शिरकत करेंगे. बैडमिंटन लीग के नये सत्र में 15 अंकों के गेम और ट्रंप मैच का नया नियम शुरू किया जाएगा.
कुश्ती लीग का साल के आखिरी महीने में सफल आयोजन हुआ. कुल छह टीमों ने इसमें हिस्सा लिया जिसमें सभी छह टीमों को दो-दो करोड़ रुपये दिये गये और विजेता मुंबई गरुण को तीन करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि भी मिली. स्टार पहलवान सुशील कुमार चोट के कारण लीग से हटे लेकिन दुनिया के विश्व चैंपियन और ओलंपिक पदक विजेता पहलवानों की मौजूदगी ने लीग में समा बांध दिया.

आईपीएल के आठवें संस्करण का आयोजन तमाम बाधाओं के बावजूद हुआ जबकि आईएसएल का दूसरा सत्र लगभग ढाई महीने चलने के बावजूद सफल रहा. कबड्डी की कामयाबी ने आयोजकों को अगले साल दो बार इसका आयोजन करने के लिये प्रेरित किया है.

हाकी लीग 2016 में नये नियमों के साथ चौथे सत्र में प्रवेश करेगी जिसमें मैदानी गोल पर दो अंक दिये जाएंगे. किसी तरह की हॉकी में यह पहला मौका होगा जब मैदानी गोल पर दो अंक मिलेंगे जिससे हाकी में स्किल को बढ़ावा दिया जाएगा. एचआईएल में इस नये नियम से दिलचस्प संघर्ष देखने को मिलेगा.
खेलों की प्रोफेशनल लीग के लिहाज से नया साल निश्चित रूप से क्रांतिकारी साबित होगा जिससे और खेलों को भी अपनी अपनी लीग शुरू करने की प्रेरणा मिलेगी.