लोकसभा में 25 कांग्रेसी सांसदों का 5 दिन के लिये निलम्बन अति की कार्यवाही और ललित मोदी का विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज की खुद की एवं उनकी मोदी सरकार की दुर्गति कर गया. वे अपनी सफाई में अपने को बेगुनाह तो नहीं साबित कर पायीं बल्कि और ज्यादा गुनाहगार हो गयीं. उन्होंने बचने की हड़बड़ी में और ज्यादा गड़बड़ी कर डाली. अब न सिर्फ उनसे इस्तीफा लेना अनिवार्य हो गया है बल्कि सदन में सरासर झूठ बोलने के लिये उन पर विशेषाधिकार भंग की भी कार्यवाही होनी चाहिए.

जब भारतीय जनता पार्टी विपक्ष में थी तब उसने स्पेक्ट्रम के मामले पर पूरा मानसून सत्र ही नहीं चलने दिया. कोल ब्लाक आवंटन के मामले में संसद की कार्यवाहियां बाधित की गयीं. उस समय कांग्रेस नेतृत्व की यू.पी.ए. सरकार ने हर तरह से उस मुश्किल से बचने का प्रयास किया. अन्तत: उसने जे.पी.पी. की मांग मानकर गतिरोध समाप्त कराया. उस समय भारतीय जनता पार्टी के सांसद निलम्बित नहीं किये गये. इस बार निलम्बन में सांसदों द्वारा सदन में प्ले कार्ड दिखाना मुद्दा बनाया गया है. सदन में न सिर्फ प्ले कार्ड दिखाना बल्कि सभी तरह का प्रदर्शन नियम के विरुद्ध है. अध्यक्ष की आसंदी के सामने आना, सदन में नारे लगाना आदि सभी तरह का प्रदर्शन वर्जित है. उसमें केवल प्ले कार्ड ही नहीं… आता है. भाजपा ने विपक्ष की भूमिका में स्वयं आसंदी के सामने आना, नारे लगाना आदि के प्रदर्शन किये हैं. आज जरूरी यह है कि न सिर्फ लोकसभा, राज्यसभा बल्कि विधानसभाओं व विधान परिषदों के अध्यक्ष एक वृहत सर्वदलीय बैठक बुलाये और संसद में आचरण की संहिता बने. इस बार निलम्बन से केवल सरकार अपने आपको मुश्किल हालातों से बचा रही है और श्रीमती सुषमा स्वराज के सफाई बयान ने उसे और ज्यादा उलझा दिया है.

जब ललित मोदी प्रकरण उछला ही था उसी समय श्रीमती सुषमा स्वराज ने स्वयं यह कहा था कि उन्होंने ललित मोदी को ब्रिटिश सरकार से कहकर ट्रेवल डाक्यूमेंट ‘मानवीय आधारÓ पर दिलाये थे. उस समय उसकी पत्नी का पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में कैंसर का आपरेशन था. अब वह संसद में अपने सफाई बयान में अपने कहे से ही मुकर यह कह रही हैं कि ललित मोदी को कोई ट्रेवल डाकूमेंट नहीं दिये- उन्होंने इसके लिए ब्रिटिश सरकार से कुछ नहीं कहा. ये दोनों परस्पर विरोधी बातें एक साथ तो सच हो नहीं सकतीं. पहली सफाई तो और भी कई साक्ष्यों में साबित भी हो चुकी है. ब्रिटिश विदेश विभाग के अधिकारियों ने यह कहा है कि श्रीमती स्वराज ने उन्हें फोन किया था कि ललित मोदी को ट्रेवल डाकूमेंट दे दिये जाएं. पुर्तगाल सरकार ने यह बताया कि उस समय लिस्बन में ललित मोदी की पत्नी का कैंसर का ऑपरेशन नहीं हुआ. यह भी प्रगट हुआ कि ललित मोदी बजाय लिस्बन जाने के क्यूबा के ह्वाना और करीबियन देशों में ट्रेवल डाकूमेंट पर मौजमस्ती का पर्यटक बना घूम रहा था.

लोकसभा के नियमों में स्पीकर को इस तरह के निलम्बन का अधिकार है. सन् 1989 के मार्च सत्र में भी प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी के शासनकाल में ठक्कर आयोग रिपोर्ट पर हंगामे में 63 सांसद निलम्बित किये गये थे. स्वयं भारतीय जनता पार्टी भी विपक्ष में रहने के समय प्रदर्शन करती है. उसने तो एक रिश्वत कांड को प्रमाणित करने के लिए लोकसभा में नोटों से भरा एक सूटकेस खोल कर उड़ेल दिया था.

मोदी सरकार सुषमा स्वराज के आचरण और परस्पर विरोधी बयानों पर उलझ कर बचने के ऐसे प्रयास कर रही है कि वह उसमें और ज्यादा उलझ गयी है.
लोकसभा में मामला तूल पकड़ रहा है. समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह व राज्यसभा में मायावती की बहुजन समाज पार्टी व केजरीवाल की ‘आपÓ पार्टी ने निलम्बन के विरोध में सदन का बायकाट कर दिया है.

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