मोदी सरकार ने सेनाओं में ‘वन रैंक- वन पेन्शन’ का निर्णय सुना दिया. फौजियों को संतोष भी है और असंतोष भी है. इस मांग पर हो रही भूख हड़ताल तो खत्म हो गयी लेकिन आन्दोलन जारी रहेगा.

6 सितम्बर शनिवार को रक्षा मंत्री श्री मनोहर पर्रीकर ने ऐलान किया. कुछ असंतोष व विरोध स्वर उभरे तो दूसरे दिन 7 सितम्बर रविवार को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस घोषणा पर और स्पष्टïीकरण दे दिया जिससे विरोध के स्वर कम हुए. 12 सितम्बर को भूतपूर्व सैनिक गौरव रैली निकालेंगे. यू.पी.ए. काल में रक्षा मंत्री रहे श्री एन्टनी ने फैसला निराशाजनक बताते हुए कहा कि उन्होंने तो इससे बेहतर योजना तैयार कर ली थी. अब इस प्रश्न पर यह प्रश्न उठना भी लाजमी है कि उस ‘तैयारÓ का क्या अर्थ जिसे घोषित ही नहीं किया और अब जब बहुत कुछ दूसरी आगे आई सरकार ने कर दिया तो अपना किया बता रहे हैं. प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भी कटाक्ष करते हुए कहा कि जिन्होंने 42 साल तक कुछ नहीं किया उन्हें सवाल उठाने का हक नहीं है. वे इसे इतने सालों तक लटकाये रहे और हमने 16 महीनों में इसे लागू कर दिया. हमने पहले दिन से इस पर काम शुरू किया और फौजियों व अन्य लोगों के इस अनुमान को सही नहीं पाया कि इस पर 300 करोड़ का खर्च आयेगा. इसमें 10 हजार करोड़ रुपयों की धनराशि लगेगी. उन्होंने फौजियों को आश्वस्त किया कि हर फौजी को वन रैंक-वन पेंशन मिलेगी. घायल जवानों को प्राथमिकता के आधार पर यह पेन्शन दी जायेगी. इसमें वी.आर.एस. को नहीं मिलेगी इसका भ्रम फैलाया जा रहा है.

सेना में 85 प्रतिशत स्टाफ जवानों का होता है जो 15-17 साल में रिटायर हो जाते है. जिन्हें अनिवार्य रूप से सेना छोडऩी पड़ती है उन्हें यह पेंशन मिलेगी. इसमें भ्रमित होने की जरूरत नहीं है.
अभी यह प्रावधान किया गया है कि पेंशन में संशोधन जिसे पांच साल के लिये किया है. पूर्व सैनिकों की यह मांग है कि इसे सालाना किया जाए.
सरकार ने 6 घोषणाएं की है. पेंशन योजना 1 जुलाई 2014 से लागू होगी. बेस ईयर 2013 के साल पर औसत पेंशन तय होगी. नयी व्यवस्था में हर पांच साल में रिवीजन होगा. स्वेच्छा से बीच में फौज छोडऩे वालों को पेंशन सुविधा नहीं होगी. फैसले पर अमल के लिये एक न्यायिक समिति बनेगी जो 6 महीने में रिपोर्ट देगी. पेंशन के एरियर 6-6 महीने के अंतराल से चार किश्तों में दिये जायेंगे. शहीद जवानों की पत्नियों को एकमुश्त एरियर दिया जायेगा.

पूर्व फौजियों ने घोषणा को मान्य करते हुए भूख हड़ताल तो खत्म कर दी लेकिन पांच आपत्तियों पर उन्होंने आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया है. वे सरकार से इन पर स्पष्टïीकरण चाहते है. उनकी मांगें है कि पेंशन प्लान 1 अप्रैल 2014 से लागू हो. 2013 के औसत नहीं बल्कि अधिकतम पेंशन को आधार माना जाए. हर दो साल में रिवीजन हो. सेना में वी.आर.एस. नहीं होता. इसे श्री मेच्योर रिटायरमेंट कहा जाता है. जिन्हें छोड़ दिया गया है उन्हें भी पेंशन मिले. अमल के लिये जो कमेटी बने उसमें तीन पूर्व सैनिकों को रखा जाए.
प्रधानमंत्री श्री मोदी के बयान के बाद फौजियों में संतोष के भाव आ रहे है और अन्य मांगों पर बातचीत के दौरों में समाधान निकलता नजर आ रहा है.

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