पांच सालों में न पकड़ा शिकारी न एक भी लकड़ी तस्कर, अब पुलिस और वनविभाग मिलकर पकड़ेंगे वन अपराधी

  • वनमंडलाधिकारी जल्द ही लिखेंगे वरिष्ठ अधिकारियों को चिट्ठी

आसिफ हसन,नवभारत न्यूज भोपाल,

राजधानी की सीमाओं पर बने वन विभाग के आठों नाकों को वनमण्डल भोपाल ने बंद करने का निर्णय लिया है. इस संबंध में अनुमति प्राप्त करने के लिए भोपाल वनमण्डाधिकारी एसपी तिवारी जल्द ही वरिष्ठ अधिकारियों को चिट्ठी लिखेंगे.

दरअसल वनअपराधियों को पकडऩे के लिए राजधानी की सीमाओं पर वनमण्डल भोपाल के आठ वन-नाके बने हुए है. इन नाकों पर 24 घंटे वनअमला मौजूद रहता है. जो कि भोपाल शहर में दाखिल होने वाले वाहनों पर नजर रखकर चौकसी करता है.

इस दौरान वाहन में शिकार या सागौन की लकड़ी होने की शंका होने पर वाहनों की तलाशी ली जाती है और बरामदगी होने पर यहां आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाता. वन नाकों पर कार्यरत स्टाफ की यह भी ड्यूटी रहती है कि सागौन छोडक़र वाहन में रखी वनविभाग से अनुमाति प्राप्त लकड़ी चैक करें और टीपी, रसीद व बिल मौजूद होने की स्थिति मेंं वाहन को माल सहित शहर में प्रवेश की अनुमति प्रदान करे.

भोपाल के वनमण्लाधिकारी एसपी तिवारी के मुताबिक पिछले पांच सालों वन नाकों पर किए गए कार्यों की जांच कराई गई जिसमें चौकाने वाले परिणाम सामने आए. इन पांच सालों में वन नाकों पर न तो कोई शिकारी पकड़ाया और न ही अवेध रूप से परिवहन की जा रही सागौन की लकड़ी पकड़ाई. तिवारी के मुताबिक कई बार यह सूचना भी मिलती रही कि जिन 52 प्रजाति की लकडिय़ों पर कटाई और परिवहन की छूट है उन लकडिय़ों पर भी वन नाकों पर बैठा स्टाफ, वाहन चालकों से अवैध वसूली करता रहता है. कुल मिलाकर जिस उद्देशय से यह नाके स्थापित किए गए थे वह पूरा न हो सका. नाकों का प्रर्दशन जीरो प्रतिशत रहा.

8 रास्ते और 8 नाके

जानकारों के अनुसार साल 1982-83 में वनमण्डल के पुर्नगठन के समय भोपाल शहर में प्रवेश करने के लिए मात्र 8 रास्ते हुआ करते थे, लेकिन बढ़ती आबादी, शहरीकरण और विकास के चलते अब भोपाल में दाखिल होने के दोगुने से अधिक पक्की सडक़ों के रास्ते बन चुके है, जिसका लाभ लेकर शिकारी हो या वनोपज तस्कर वह नाकों वाला रास्ता छोडक़र अन्य रास्ते से शहर में प्रवेश कर अपनी मंजिल तक पहुंच जाता है.

यहां बने हैं वन नाके

विदिशा रोड-निशातपुरा, रायसेन रोड-पटेल नगर बायपास, होशंगाबाद रोड-अहमदपुर, कोलार रोड-चीचली, रातिबढ़ रोड-भदभदा, बैरसिया रोड-लांबाखेड़ा, सीहोर रोड-भैसाखेड़ी बैरागढ़, गांधीनगर-मुबारकपुर बायपास. इन आठ नाकों में से भदभदा और कोलार के नाके कुछ समय पहले ही बंद किए जा चुके है.

होता यह था

वन विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक राजधानी में रोजाना आधा दर्जन से अधिक शिकारी वाहनों में बैठकर शहर से जंगलों में वन्यप्राणिंयों का शिकार करने जाते थे और शिकार मारने के बाद उसे अपने वाहन में रखकर बिना रोकटक भोपाल में दाखिल हो जाते है ऐसे ही छोटे और बड़े ट्रकों में जंगल से अवैध तरीके से काटी गई सागौन की लकड़ी को भी भरकर शहर की कुछ आरामशीनों और फर्नीचर की दुकानों पर सप्लाई कर दिया जाता था.

सूत्रों के मुताबिक कई बार शिकार और सागौन तस्करों से कुछ भृष्ट वनकर्मियों की मिलीभगत का भी खुलासा हुआ है, इस कारण उन वनकर्मियों के भृष्ट्रचार की जांच तो हुई लेकिन बड़े नेता और अधिकारियों से संपर्कों और रसूख होने के कारण उनपर कार्रवाही नहीं की जा सकी. लंबे समय से चले आ रहे इसी चलन को देखते हुए भोपाल के कंसरवेटर, डा.एसपी तिवारी ने कड़ा फैसला लेते हुए अब भोपाल की सीमाओं पर बने सभी नाकों को बंद करने का निर्णय लिया है

इनका कहना है

नाकों को बंद करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को चिटठी लिखी जा रही है. नाकों की वैकल्पिक व्यावस्था के लिए उडऩदस्ते के 4 मोबाइल दस्ते बनाए जाएंगे, जिनहे अलग-अलग वाहन उपलब्ध होंगे. वाहनों में बैरिकेड्स भी रखें होगे. पुलिस की तरह किसी भी रोड पर यह मोबाइल दस्ते बैरिकेडिंग करके वाहनों को रोक कर चैकिंग कर सकेंगे. वनअमले की सहायता के लिए पुलिस विभाग की भी मदद ली जाएगी, पुलिस बल भी वनअमले के साथ चैकिंग कर सकेगा.
-डॉ. एसपी तिवारी, वन संरक्षक, भोपाल

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