दूसरा भाद्रपद का महीना अब समाप्ति की ओर है और वर्षा भी अब आखरी हल्लों व झल्लों से यदा-कदा होती जा रही है. इसकी भारी वर्षा में अति वर्षा की स्थिति बनी और जनजीवन व खेती में परेशानी भी आई है. केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शरद यादव ने यह सुखद समाचार भी दिया है कि बरसात के आखरी दौर की वर्षा से देश में कृषि की हालत में काफी सुधार आया है. किसानों को चाहिए कि इस खुलते जा रहे मौसम में अपनी फसलों को कीटों से बचाने के सभी प्रयास शुरु कर दें. इसी समय फसलों पर कीट प्रकोप आता है.

सरकार को यहां यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसानों को उपयुक्त कीटनाशक उपलब्ध रहे और इस पर भी नजर रखना होगी कि बाजार में नकली कीटनाशक न पहुंच पायें. श्री शरद पवार ने राज्यों व उद्योगपतियों को परामर्श दिया है कि अब देश कृषि के क्षेत्र में बम्पर उत्पादन के क्षेत्र में पहुंच चुका है. उद्योग जगत के लिये भी स्वर्ण अवसर है अब वे कृषि आधारित उद्योगों को लगायें. देश अभी भी रासायनिक खादों को विदेशों से आयात करता है. देश में ही इनकी भारी खपत है. यदि यहां के उद्योगपति इसमें कूद पड़े तो देश का अन्दरुनी बाजार में सारा उत्पादन काम आ जायेगा. साथ ही कृषि यन्त्रों के अनुसंधान पर भी उद्योग जगत को निवेश करना चाहिए. कृषि और उद्योगों के पारस्परिक सामंजस्य से देश में दोनों एक-दूसरे के पूरक बन जायेंगे. देश में खाद्यान्न उपज बढ़ती ही जाना है. उसका उपयोग केवल निर्यात में नहीं होना चाहिए. देश में कृषि उद्योगों का जाल बिछा
देना होगा.

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