वेधशाला उज्जैन में आमजन टेलीस्कोप पर देख सकेंगे

नवभारत न्यूज उज्जैन/ग्वालियर

इस वर्ष का पहला पूर्ण चन्द्रग्रहण 31 जनवरी बुधवार तिथि पूर्णिमा को हो रहा है। चन्द्र ग्रहण दक्षिण अमेरिका, रशिया, एशिया एवं एवं पूर्वी यूरोप में दृश्य होने के कारण भारत में अच्छी प्रकार से देखा जा सकता है।

ग्रहण का प्रारंभ सायं 5 बजे 18 मिनट व 2 सैकंड पर होगा। पूर्ण ग्रहण की स्थिति सायं 6 बजकर 59 मिनिट 9 सैकंड पर होगी तथा मोक्ष रात्रि 8 बजकर 41 मिनिट 6 सैकंड पर होगा। इस प्रकार ग्रहण की अवधि 3 घंटे 23 मिनिट 4 सैकंड तक रहेगी।

ग्रहण का प्रतिशत 132.1 होने के कारण चन्द्रमा पूर्ण ग्रहण की स्थिति में रहेगा। ग्रहण के प्रारंभ के समय उज्जैन में धूप खिली होगी, उज्जैन में चन्द्रोदय सायं 6 बजकर 8 मिनिट पर होगा। अत: हम ग्रहण को सायं 6 बजकर08 मिनिट बाद ही देख सकेंगे। डॉ. राजेन्द्र प्रकाश गुप्त अधीक्षक शा. जीवाजी वेधशाला उज्जैन ने बताया है कि वेधशाला में टेलिस्कोप के माध्यम से ग्रहण देखने की व्यवस्था की गई है।

टेलिस्कोप से ग्रहण देखने की स्थिति चन्द्रमा के टेलिस्कोप की परिधि में आने पर ही बनेगी। अत: हमें चन्द्रोदय के पश्चात लगभग आधा घंटा अर्थात सायं 6.38 तक इंतजार करना होगा, जिससे चन्द्रमा क्षितिज से कुछ ऊपर टेलिस्कोप की रेंज तक आ सके। आमजन वेधशाला आकर इस खगोलीय घटना के साक्षी बन सकते हैं। यह घटना ग्रहण समाप्तिकाल रात्रि 8 बजकर 41 मिनिट तक दिखाई जाएगी।

ग्रहण को लेकर ज्योतिष शास्त्रों ने भी शुभ-अशुभ फलों का आंकलन करना शुरू कर दिया है। ग्रहण को लेकर दान-पुण्य की भी बात कही जा रही है वहीं कई राशियों पर इसके अच्छे और बुरे प्रभाव की बात कही जा रही है। ग्रहण को लेकर आमजन में काफी उत्सुकता बनी हुई है।

हर कोई खुली आंखों से दिखाई देने वाले चन्द्रग्रहण को देखने के लिए उत्सुक दिखाई दे रहा है। वैधशाला पर जहां टेलीस्कोप से चन्द्र्रग्रहण का नजारा दिखाया जाएगा वहीं इस बात को भी स्पष्ट किया जाएगा कि ग्रहण क्यों और कैसे लगता है। यहां पहुंचने वाले लोगों को जानकारी देने के लिए वैधशाला अधीक्षक के साथ पर्यवेक्षक दीपक गुप्ता ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं।

सबसे पास होगा मंगल

इस साल 27 जुलाई को रेड प्लेनेट मार्स (मंगल) 2003 के बाद पृथ्वी के सबसे पास होगा। इस दौरान मार्स एट अपोजिशन की घटना होगी यानी जब पश्चिम में सूर्य डूब रहा होगा तो पूर्व में पूर्णिमा के चंद्रमा के साथ मंगल उदय हो रहा होगा। इस समय बृहस्पति को भी उसी आकाश में देखा जा सकेगा।

दो धूमकेतु की भी रहेगी धूम

दिसंबर के दूसरे पखवाड़े को दो धूमकेतु को देखा जा सकेगा। इन्हें देखने के लिए टेलिस्कोप की मदद लेनी होगी। जानकारों का है कि आने वाले समय में 2018 में पृथ्वी से आकाश में बहुत कुछ रोचक और रोमांचक देखने के लिए मिलेगा।

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