air_Forceराफेल विमानों की खरीद में हो रही देरी के बीच वायुसेना ने साफ किया है कि उसके पास युद्धक विमानों की कमी है. वायुसेना के अनुसार विमानों की कमी के कारण उसकी ताकत घट रही है और यदि चीन और पाकिस्तान से एक साथ दो मोर्चों पर लडऩा पड़ा तो उसके लिए हवाई सैन्य अभियान का क्रियान्वयन करना मुश्किल हो जाएगा.

वायुसेना उप प्रमुख एयर मार्शल बीएस धनोवा ने संवाददाताओं से बातचीत में दो टूक कहा कि हमारे पास लड़ाकू विमानों की संख्या इतनी उपयुक्त नहीं है कि दो मोर्चों वाली स्थिति में हवाई अभियान चला सकें. उनसे सवाल पूछा गया था कि क्या वायुसेना एक साथ चीन एवं पाकस्तिान के खिलाफ युद्ध की स्थिति में निपटने की क्षमता रखती है? हालांकि वायुसेना सूत्रों का कहना है कि युद्ध की नौबत अभी नहीं आने वाली है तथा वायुसेना आवश्यक क्षमता हासिल करने में जुटी हुई है. धनोवा ने कहा कि हमने अपनी चिंता से सरकार को अवगत करा दिया है. राफेल के अलावा हमें पांचवीं पीढ़ी के और लड़ाकू विमान भी चाहिए. हालांकि कुल 126 राफेल विमानों की खरीद होनी थी जिसमें से 36 खरीदे जा रहे हैं. लेकिन वायुसेना बाकी विमानों की खरीद भी चाहती है.

वायुसेना के पास अभी विमानों के 33 स्क्वाड्रन हैं जबकि उसकी स्वीकृत संख्या 42 स्वाड्रन की है. इन 33 विमानों में बड़ा हिस्सा रूसी सुखोई-30 विमानों का है. सुखोई-30 फिलहाल देश की अग्रिम पंक्ति का विमान है. लेकिन इस विमान की सेवा के समय उपलब्धता की स्थिति बहुत खराब है जो करीब 55 फीसदी है. इसका मतलब यह है कि 100 विमानों में से करीब 55 विमान एक समय पर सेवा में तैनात किए जा सकते हैं.

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