भारत-पाकिस्तान के विदेश सचिव स्तर की प्रस्तावित 15 जनवरी को होने वाली वार्ता की तिथि आगे किसी समय निर्धारित करने के लिये आगे बढ़ा दी गयी. पिछली बार की तरह इस बार भारत ने वार्ता रद्द नहीं की है. दोनों देशों की सरकारों ने पठानकोट एयरबेस पर हमले के मद्देनजर वार्ता को आपसी सहमति से फिलहाल न करके आगे किसी तिथि पर करने का तय किया है.

पिछली बार भारत ने इसी प्रकार की निर्धारित वार्ता को इस बात पर रद्द कर दिया था कि वार्ता से पहले भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त श्री बासिन ने कश्मीर के भारत विरोधी हुर्रियत व जमाते इस्लामी के नेताओं को वार्ता के संदर्भ में विचार-विमर्श को बुलाया था. पाकिस्तान इस बात के लिए सतत् रूप से प्रयासरत् है कि भारत-पाक वार्ता में काश्मीर के भारत विरोधी हुर्रियत व जमात के लोगों को तीसरा पक्ष बनाया जाए जबकि बंगलादेश युद्ध व स्वाधीनता के बाद भारत-पाक के बीच प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी व पाकिस्तान के राष्ट्रपति श्री भुट्टो ने शिमला समझौते की संधि में यह तय किया है कि भारत-पाकिस्तान के बीच सभी मसले द्विपक्षीय रहेंगे.

काश्मीर में संयुक्त राष्ट्र नियंत्रण की युद्ध विराम रेखा से संयुक्त राष्ट्र की भूमिका खत्म कर उसके पर्यवेक्षकों को वापस कर उसे नियंत्रण रेखा माना जायेगा. इसी के तहत संयुक्त राष्ट्र व अन्य सभी देश पाकिस्तान से कह चुके हैं कि अब काश्मीर का मसला अन्तरराष्ट्रीय नहीं है और इसे दोनों देशों को ही आपस में तय करना है.

प्रधानमंत्री श्री मोदी के अल्प समय के लिये अद्र्धशासकीय… यात्रा के रूप में श्री नवाज से मिलने लाहौर जाने से दोनों देशों के बीच फिर से सचिव स्तर की वार्ता और उसके बाद प्रधानमंत्री स्तर की वार्ता का प्रस्ताव है. हाल ही में विदेश मंत्री श्री सुषमा स्वराज भी पाकिस्तान होकर आयी हैं. पहले श्री अटल बिहारी वाजपेयी नवाज शरीफ की लाहौर वार्ता को वहां की सेना ने कारगिल युद्ध से मटियामेट कर दिया. दूसरी बार वार्ता के प्रयास को पाकिस्तान ने हुर्रियत से बात कर खत्म कर दिया और तीसरी बार की वार्ता को पठानकोट हमले से आगे बढ़ाना पड़ा. इसी बीच अफगानिस्तान में चरारे शरीफ में भारत के कान्सुलेट पर हमला हुआ. अफगान सरकार ने कहा है कि हमलावर पाकिस्तान की आर्मी के लोग थे.

पाकिस्तान में नागरिक सरकार और सेना तथा आतंकियों के बीच टकराव की स्थिति है. वहां सेना व आतंकी भारत से नाते-रिश्ते सुधारने के विरुद्ध हैं और वे उसे ‘सेबोटाजÓ करते हैं. अभी वार्ता आगे टली है- उसे खत्म नहीं किया गया है. अब पाकिस्तान की सरकार को ही यह तय करना है कि वह दोनों देशों के बीच तीसरे पक्ष को नहीं जोड़ेगी. साथ ही उसे सेना व आतंकियों के वार्ता विरोधी रवैया को भी पहले खत्म करना होगा, अन्यथा वार्ता के लिये ही वार्ता होगी, उसका कोई भी सकारात्मक परिणाम नहीं निकलेगा.

अब बात इस इरादे व मंशा से की जाए कि विवाद को हमेशा के लिये निपटाना चाहिए. पाकिस्तान में चुनाव आने वाले हैं इसलिये वहां जनरल परवेज मुशर्रफ भी उसी के मद्देनजर यह कह रहे हैं कि पठानकोट जैसे हमले होते रहेंगे और भारत को धमकी दे रहे हैं कि वह भारत के खिलाफ चुप नहीं बैठेगा. दोनों देशों के बीच वार्ता सफलता इसी पर निर्भर करेगी कि वहां नागरिक सरकार की अंदरुनी तौर पर क्या हैसियत हस्ती है.

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