मोदी सरकार के विकास केदावे एक के बाद एक खोखले साबित होते जा रहे हैं. विदेश सेे कालाधन लाने पर खंब ठोंंक कर सत्ता मेंं आये और ‘जीरो’ पर ही रहे. कुछ करना था तो देश के अन्दर का काला धन निकालने के लिये देश भर में नोटबंदी थोप दी. नतीजा यह हुआ कि इस समय देश की विकास दर (ग्रोथ रेट) पिछले तीन सालों में घटकर 7.1 प्रतिशत रह गयी. मोदी सरकार ने हाल ही में तीन साल के शासन की जयंती मना रही है और इन तीनों सालों की आर्थिक उपलब्धि यह है कि इस समय देश की विकास दर सबसे ज्यादा घटी दर पर आ गयी.

दमखम इसमें भी दिखाया कि हर साल देश में 2 लाख रोजगार के नये अवसर बनेंगे और हो यह रहा है कि औद्योगिक और सरकारी क्षेत्र में भी रोजगार के अवसर कम हुए हैं.

ऐसोसिएट चेम्बर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष श्री संदीप जाजोदिया ने कहा है कि उद्योग जगत का मेन्युफेक्चरिंग सेक्टर अभी भी नोटबंदी के भारी आघात से उबरा नहीं है. नयी नौकरियों के लिये जरूरी है कि रिजर्व बैंक दरों में कमी करें. जो अभी तक इन तीन सालों में नहीं किया जा सका है. गत वर्ष 2016 में 8 नवंबर को 500 और 1000 के नोट बंद कर दिये गये और देश में एकाएक 87 प्रतिशत मुद्रा चलन से बाहर हो गयी. इससे सभी तरह के व्यापार व बाजारों में लोगों उपभोक्ता की डिमांड तेजी से नीचे आ गयी. और उसी के साथ उस समय विकास दर 6.1 प्रतिशत पर आ गिरी.

कहा यह कि बड़ा नोट काला धन बनता है इसलिए 500/1000 के नोट बन्द किये जा रहे हैं और उनसे भी बड़ा 2000 का नोट जारी कर दिया. आज तक देश को उस बात का जवाब नहीं दिया जा रहा है कि 2000 का नोट क्यों जारी किया और उससे क्या हुआ? लोगों को 500/1000 के बन्द नोटों के जगह इसी मूल्य के नये नोट चाहते थे. वे तो मिले नहीं और देश में त्राहि-त्राहि मच गई. 2000 का नोट नये सिरे से फिर काला धन बन गया.
ग्रोथ रेट की गिरावट का आंकलन यह आया है कि पिछली मार्च की तिमाही में उद्योग जगत की मेन्युफेक्चरिंग 12.7 प्रतिशत से घटकर 5.3 प्रतिशत रह गई. निर्माण क्षेत्र में ग्रोथ रेट निगेटिव हो गई. यह 6 प्रतिशत से घटकर माइनस 3.7 प्रतिशत पर आ गई.

यह गिरावट भी उस दौर में आई जब देश के बहुत अच्छे मानसून की वजह से पूरे साल कृषि उत्पादन बढ़कर 4.9 प्रतिशत रहा. अच्छा मानसून प्रकृति का वरदान था वह मोदी सकार का करिश्मा नहीं है. कृषि विकास दर 0.7 से बढ़कर 4.9 प्रतिशत हुई है.

सरकार की तरफ से यह कहा जा रहा है कि नोटबंदी का असर अस्थाई है इसलिये आने वाले समय में ग्रोथ रेट बढ़ेगी. देश के 8 प्रमुख उद्योग क्षेत्रों कोयला, पेट्रो क्रूड ऑइल, सीमेंट में उत्पादन गिरने से इस क्षेत्र की विकास दर गिरकर 2.5 प्रतिशत रह गयी. जबकि इसमें पहले साल में यह 8.7 प्रतिशत बढ़ा था.

नोटबंदी काले धन पर महज एक दिखावा था. कहा गया कि इससे जाली नोट चलन से निकल जायेंगे और उन्हीं दिनों 2000 के नोट के जाली नोट भी आ गये. ऑनलाइन का भी काफी हल्ला मचा हुआ है और बैंकों में धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाएं लोगों को अमीर से गरीब बना रही हैं. बैंकों को लूट लेना अब आये दिन का साधारण सा अपराध बन गया है. बैंकों एटीएम को उखाड़ कर ले जाना चोरी तो नहीं बल्कि डकैती है. बैंकों की सेवाएं लगातार महंगी होती जा रही हैं. लोगों की जमा राशि पर ब्याज दर लगातार घटायी जा रही है और रिजर्व बैंक अभी भी बैंकों की ब्याज दर कम नहीं कर रहा है.

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