मोदी सरकार को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश जितना आने की उम्मीद थी वह निराशाजनक स्थिति में है. इस नीति में तीसरी बार परिवर्तन किया गया है. रेलवे में भारी निवेश की जरूरत है और सरकार को उम्मीद थी कि इससे विदेशी निवेश आने से रेलों का विकास बढ़ाया जा सकेगा. लेकिन रेलवे में विदेशी निवेश बहुत ही कम आया है. अब रेल मंत्रालय ने नीति बनायी है कि वह राज्य सरकार के साथ हर राज्य में रेल विकास कंपनी बनायेगा. श्री जार्ज फर्नान्डिस जब रेल मंत्री थे तब उन्होंने कोंकण रेल बनाने के लिये महाराष्टï्र के साथ संयुक्त कंपनी बनायी थी.

विदेशी निवेश के आने में उत्साहवर्धक स्थिति न होने का एक बड़ा कारण विश्व में आर्थिक मंदी और यूरोपीय यूनियन में ग्रीस का आर्थिक संकट… भी रहा. साथ ही बड़ा निवेशक कभी भी एकदम से नहीं कूदता है. अभी मोदी सरकार को सत्ता में एक साल ही पूरा हुआ है. बड़े निवेशक सारे विश्व को नजर में रखकर निवेश के फैसले लेते हैं.

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की नीति प्रधानमंत्री श्री नरसिम्हराव के शासन में शुरू हुई और प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह ने उसे आगे बढ़ाया. मोदी सरकार ने भी विदेशी निवेश को अपनी सरकार की आर्थिक व विकास नीतियों में महत्वपूर्ण स्थान दिया. पहले विदेशी निवेश की सीमा 52 प्रतिशत थी, उसे कुछ आगे बढ़ाया और बाद में उसे शत-प्रतिशत कर दिया. इसमें कुछ वर्गीकरण थे अब उन्हें भी खत्म कर दिया है और सभी प्रकार के विदेशी निवेश के लिये संयुक्त सीमा की घोषणा कर दी है.

अभी मौजूदा व्यवस्था (1) प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ.डी.आई.) (2) एफ.आई.आई. (फारेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टमेंट) और (3) एन.आर.आई. (प्रवासी भारतीय) जैसी अलग-अलग निवेश के लिए अलग-अलग सीमायें हैं. अब नई नीति में इन सभी तरह के विदेशी निवेश को मिलाकर संयुक्त सीमा के रूप में देखा जायेगा. इन तीनों प्रकार के विदेशी निवेशों को एक साथ जोड़ दिया गया है. इसे संयुक्त सीमा माना जायेगा. इसका उद्देश्य प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को सरल बनाना है ताकि अधिक विदेशी निवेश आकर्षित किया जा सके.
वर्ष 2014-15 में विदेशी (एफ.आई.आई.) संस्थागत निवेश 717 प्रतिशत बढ़कर 40.92 अरब डालर जबकि एफ.डी.आई. 27 प्रतिशत बढ़कर 30.93 अरब डालर रहा. रेल विकास में जापान काफी पहले से ही बहुत विकसित व बुलट ट्रेन पर पहुंच गया है. उस समय यह कहा जाता था कि वह बहुत छोटे भू-भाग का देश है इसलिए रेल विकास बड़े रूप में दिख रहा है. लेकिन भारत से बड़े भू-भाग के चीन ने हाल ही के वर्षों में रेल विकास में आश्चर्यजनिक तरक्की कर ली है. वह तिब्बत और भारतीय सीमाओं तक रेल नेटवर्क ले आया और बुलट ट्रेन के युग में पहुंच गया है. भारत को अब यह अहसास हुआ है कि देश के नक्शे को देखें तो कई बड़े-बड़े क्षेत्र रेल मेें शून्य हैं. देश के विकास के लिये रेल का विकास सबसे ज्यादा अहम् है. ओवर ब्रिज, अंडर ब्रिज, आदर्श स्टेशन योजना सहूलियत का कार्यक्रम है. रेल विकास का अर्थ होगा कि नये रेल लाइनें नये क्षेत्रों में कितनी बिछायी गयी हैं इसमें निवेश चाहे स्वयं का हो या विदेशी उसे अब होना ही चाहिये.

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