भारत में विदशी निवेश ने अपनी रफ्तार पकड़ ली. रिजर्व बैंक भी इस भूमिका में आ गया है कि ब्याज दरों को निवेश उन्मुख बनाने के लिये उन्हें कम किया जाए. लेकिन यह अंदेशा बना हुआ है कि सरकारी नीतियों में व्यवधान व लेटलतीफी से ऐसे उत्साही वातावरण पर प्रतिकूल असर न पड़ जाए. प्रधानमंत्री श्री नरसिंहाराव ने देश में राष्टï्रीयकरण व सरकारी उपक्रमों की नीति का निजी निवेश को पुन: देश के व्यापार-उद्योग जगत में लाये. बाद की कांग्रेस नेतृत्व की यू.पी.ए. सरकारों ने इस नीति को और आगे बढ़ाकर सरकारी उपक्रमों में विनिवेश की प्रक्रिया और विदेशी निवेश की नीति व प्रक्रिया प्रारंभ कर दी.

वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय सरकार ने विदेशी निवेश को और आगे बढ़ा दिया और भारत में निवेश के साथ ‘भारत में बनाओÓ (मेक इन इंडिया) की नीति को लागू कर दिया. अनेक विकसित राष्टï्र अपने उद्योग व्यवसाय के लिएभारत की ओर तुरन्त आने लगे है. सैनिक महत्व के फाइटर प्लेन व हेलीकाप्टर बनाने वाले देश जो अब तक भारत को इन्हें उनका यहां बना हुआ माल के रूप में बेचते रहे थे. इस बात के लिये खुशी व उत्साह से आगे आ रहे हैं कि वे उन उपकरणों को भारत में आकर ही बनवायेंगे और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिये भी तैयार है. ऐसे करारों के लिये औद्योगिक रूप से विकसित राष्टï्र में परस्पर प्रतिस्पर्धा चल रही है. प्रतिस्पर्धा उद्योग-व्यापार जगत की सामान्य प्रक्रिया है और इसमें परस्पर देशों को लाभ मिलता है.

इस समय विदेशी निवेश की हालत यह है कि विदेशी रोजाना भारत में 1000 करोड़ रुपयों का निवेश कर रहे हैं. पिछले दो माह में अब तक कुल साढ़े 68 हजार करोड़ रुपये देश में विदेशी निवेश आ चुका है जो 11 बिलियन अमेरिकी डालर के बराबर है. बाजार विशेषज्ञों की यह धारणा है कि आने वाले समय में यह निवेश और गति पकड़ेगा. विदेशी निवेशकों ने इस अवधि में डेट मार्केट में कुल खरीददारी 37,396 करोड़ रुपयों की रही. जबकि पिछले वर्ष 2014 में यह खरीददारी 2.56 लाख करोड़ की रही थी.

रिजर्व बैंक ने हाल ही अगली मौद्रिक समीक्षा से पहले दूसरी बार ब्याज दरों में कटौती कर देशी व विदेशी निवेश और उद्योग-व्यापार जगत को प्रोत्साहित किया है. इस बात की आर्थिक सम्भावनाएं निर्मित हो गयी है कि अगले तीन सालों में भारत में बैंक ब्याज दरें 7.4 प्रतिशत पर रहने की उम्मीद है.

रिजर्व बैंक के गवर्नर श्री रघुराम राजन ने कहा है कि वैश्विक रुझानों के आसान होने और आर्थिक विकास की गति धीमी होने के संदर्भ में और महंगाई के नये लक्ष्यों का लाभ उठाने के लिये नये दिशा-निर्देशों की जरूरत है. इसी संदर्भ में सन् 2015-16 के केन्द्रीय बजट में ‘गारÓ (जनरल एंटी एवायडेन्स रुल्स) को टाल दिया गया है और इन पर पुनर्विचार का निर्णय लिया गया है.

केन्द्र सरकार ने अगले वित्त वर्ष में 1000 करोड़ डालर (62,000 करोड़ रुपयों) का विनिमेश लक्ष्य तय किया है. पून्जी बाजार का नियामक ‘सेवीÓ भी बड़ी भूमिका सम्हालने के लिये नई तैयारी में लग गया है. वह तेजी से बढ़ रहे बांड मार्केट को विकसित करने और डेरिवेटिव सभी सेगमेन्ट के लिये समान नियामक प्रणाली बनाने के लिये नये रोडमेप पर काम शुरु कर दिया है.
इसके साथ ही सार्वजनिक कम्पनियों के शेयरों और बड़ा हिस्सा आम निवेशकों को दिलाया जायेगा.

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