21 जून को संयुक्त राष्टï्र विश्व योग दिवस का प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति और योग क्रिया करने के साथ राजधानी दिल्ली के राजपथ को योगपथ बनाकर बड़ा ही भव्य आयोजन किया. इसके दो दिन बाद ही 23 जून को संयुक्त राष्टï्र द्वारा घोषित ‘विश्व विधवा दिवसÓ था, लेकिन मोदी सरकार ने उस दिन कुछ नहीं किया. जबकि स्वयं उनके चुनाव क्षेत्र वाराणसी और मथुरा वृंदावन में हिन्दू विधवाएं बड़ी दुर्दशा में घरों से त्याग दी गयी स्थिति में भयंकर गरीबी, उपेक्षा का जीवन दूसरों के दयाभाव में जी रही है. दूसरे धर्मों में तो विधवा विवाह उनकी धार्मिक व सामाजिक मान्यताओं में आता है लेकिन हिन्दू धर्म में अभी यह समाज सुधार के रूप में आने लगा है.

वाराणसी व वृंदावन की अधिकांश विधवाओं को उनके परिजन ही इन दोनों हिन्दू तीर्थस्थानों में छोड़कर उन्हें ‘वनवास’ की तर्ज पर काशी व वृंदावन वास देकर हमेशा के लिये छोड़ देते है. वे वापस आना भी चाहती है तो उन्हें आने नहीं देते. काशी-वृंदावन की विधवाएं हिन्दू धर्म का बड़ा ही कुलषित व क्रूर चेहरा है. मोदी जी को योग दिवस तो बहुत भाया लेकिन खुद उनके ही चुनाव क्षेत्र वाराणसी की विधवाओं का कोई ध्यान नहीं आया. वे सबकी सब हिन्दू हैं. वृद्धजनों के प्रति जो लोगों का उपेक्षा, क्रूर और निर्दयी रूप बढ़ता ही जा रहा है. लेकिन हिन्दू विधवाओं का दारुण जीवन अनन्त काल से मानवीय त्रासदी के रूप में चला आ
रहा है.

काशी में विधवाओं के संदर्भ में एक दहला देने वाली कहावत चलती है जो उस धार्मिक नगर में क्या होता है उसे दर्शा देती है- ‘रांड, सांड, सीढ़ी, सन्यासी- इनसे बचें तो सेवें काशीÓ. यहां छोड़ दी गई विधवाओं को यौन शोषण में झोंक दिया जाता है और यहां जो सन्यासी बने घूमते हैं उनमें अधिकांश अय्याश व यौन दलाल होते हैं.
मोदी जी से काफी पहले ही एक क्रियात्मक नेता श्री विंधेश्वर पाठक ने भाषण नहीं दिये- लेकिन लोग शौचालय का इस्तेमाल करें और मैला ढोने की अमानवीय प्रथा का अंत हो उसके लिए सुलभ शौचालय को सारे भारत में बनाकर कहा नहीं बल्कि करके दिखा दिया.

इन्हीं श्री पाठक ने अब वाराणसी व वृंदावन की त्याग दी गयी विधवाओं की दशा सुधारने का संकल्प लिया है. भारत में केवल श्री पाठक ने विश्व विधवा दिवस पर उन्हें संगठित कर यह मांग उठायी है कि श्री मोदी इन विधवाओं के कल्याण व संरक्षण के लिये ‘विधवा संरक्षण विधेयकÓ संसद के आने वाले मानसून सत्र में लायें.

सरकार तो उदासीन रहीं लेकिन वाराणसी व वृन्दावन में सुलभ इंटरनेशनल व उसके प्रणेता श्री विंधेश्वर पाठक ने 23 जून को यह दिवस मनाया. सुलभ संस्था ही इन त्याज विधवाओं के कल्याण में उसी तरह मन, कर्म, वचन से लगी है जैसे उसने सुलभ शौचालय का बहुत बड़ा काम देश में चलाया हुआ है. श्री मोदी का वाराणसी से लोकसभा सांसद और प्रधानमंत्री होने के नाते उनका नैतिक कर्तव्य हो जाता है कि वे वाराणसी और वृंदावन के संदर्भ में पूरे देश से विधवा त्रासदी खत्म करें और उन्हें सम्मान-सुविधाजनक जीवन दें.

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