मनोज पुरोहित
शाजापुर,

अधिकारियों के प्रति विधायकों की नाराजगी कोई नई बात नहीं है, लेकिन भाजपा के ही एक विधायक ने अपनी इस सरकार के सिस्टम पर कई गंभीर सवाल उठाए. बुधवार को प्रभारी मंत्री की मौजूदगी में जिस तरीके से पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार को लेकर विधायक ने गुस्सा निकाला, उससे एक बार फिर भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का दावा खोखला साबित हुआ.

शाजापुर जिले के कालापीपल से भाजपा विधायक इंदरसिंह परमार अपने क्षेत्र के पुलिसकर्मियों की कार्यप्रणाली से इतने नाराज थे कि उन्होंने प्रभारी मंत्री दीपक जोशी की बैठक में अपना गुस्सा जाहिर किया.

गुस्से का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रभारी मंत्री की बैठक छोडक़र उन्होंने पत्रकारों के सामने उज्जैन रैंज के आईजी और एसपी पर कई गंभीर आरोप लगाए. वे पुलिस कार्यप्रणाली से इतने नाराज नजर आए कि बैठक में इस्तीफा देने तक की धमकी दे दी.

यहां तक कि भाजपा जिलाध्यक्ष ने रोकने का प्रयास किया, तो उन्होंने कहा कि वे संगठन से कार्रवाई करा दें, लेकिन मेरे क्षेत्र में भ्रष्टाचार सहन नहीं किया जाएगा. शाजापुर जिले में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच तकरार का यह पहला मामला नहीं है.

इसके पहले शाजापुर विधायक अरुण भीमावद की तत्कालीन कलेक्टर राजीव शर्मा से पटरी नहीं बैठी और शाजापुर जिले के विधायकों ने मु यमंत्री से शिकायत कर राजीव शर्मा को हटवाया. यही आलम आगर जिले में है, जहां विधायक गोपाल परमार और तत्कालीन कलेक्टर विजय बहादुर सिंह के मतभेद जगजाहिर थे. सुसनेर विधायक मुरली पाटीदार भी तत्कालीन सुसनेर एसडीएम सोहन कनाश को हटाकर ही माने.

अधिकारियों के प्रति जनप्रतिनिधियों का यह गुस्सा समझ से परे है. बुधवार को जिस तरीके से कालापीपल विधायक इंदरसिंह परमार गुस्से से तमतमाए हुए थे, उसे देखकर कह सकते हैं कि नौकरशाही से विधायकों को तवज्जौ नहीं मिल रही. यही कारण है कि छोटी-छोटी बातों पर विधायकों को अधिकारियों पर गुस्सा होते सार्वजनिक रूप से देखा गया है.

विधायकों का कहना, नहीं सुनते हैं अधिकारी

अधिकांश विधायकों के गुस्से की प्रमुख वजह यह है कि जिले के अधिकारी उनकी बात को गंभीरता से नहीं लेते हैं.

बुधवार को कालापीपल विधायक इंदरसिंह परमार ने जनता को बेवजह परेशान करने वाले पुलिसकर्मियों की जब शिकायत की, तो पुलिस के आला अधिकारियों ने शिकायत को गंभीरता से न लेकर जांच का आश्वासन दिया, जिससे परमार को इतना गुस्सा आ गया कि उन्होंने पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर अति गंभीर आरोप लगाकर अपनी ही सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा दिए.

कार्यकर्ता की बात नहीं सुनी जा रही है, जिससे विधायक भी कहीं न कहीं नौकरशाही के हावीपन से नाराज हैं. यही कारण है कि विधायकों का जरा-जरा सी बात पर अधिकारियों पर गुस्सा फूट रहा है.