नयी दिल्ली,

सरकार ने आज राज्यसभा में कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए त्वरित अदालत बनाने के उच्चतम न्यायालय के निर्देश का विधि निर्माताओं को सम्मान करना चाहिए।

सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होने पर व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुये समाजवादी पार्टी के नरेश अग्रवाल ने इस मुद्दे को उठाया और कहा कि इससे सांसदों और विधायकों की छवि खराब हो रही है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत सभी को समानता का अधिकार है और इसलिए त्वरित न्याय सबको मिलना चाहिए।

कांग्रेस के आनंद शर्मा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मजीद मेनन, मनोनीत केटीएस तुलसी ने भी श्री अग्रवाल की बातों का समर्थन किया जबकि तेलुगुदेशम् के सी.एम. रमेश ने कहा कि नीति निर्माताओं को आम लोगों से ऊपर उठकर उच्चतम न्यायालय के निर्देश का सम्मान करना चाहिए।

इस पर सदन के नेता अरुण जेटली ने कहा कि वह श्री रमेश की बातों से पूरी तरह सहमत हैं और नीति निर्माताओं को अदालत के निर्देश का सम्मान करना चाहिये। सभी को त्वरित न्याय दिलाना सरकार की प्राथमिकता है, लेकिन नीति निर्माताओं के लिए यदि त्वरित अदालत बनता है तो अच्छा है।

विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि विपक्षी सदस्यों ने जो बात कही है उसकी गलत व्याख्या की जा रही है। कानून सब के लिए बराबर होता है।

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