Arun-Jaitleyनई दिल्ली, 11 अगस्त. संसद के मॉनसून सत्र में हंगामे के बीच सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को मंगलवार को चर्चा के लिए राज्यसभा में पेश किया, लेकिन कांग्रेस सदस्यों के हंगामे के कारण इस पर चर्चा नहीं शुरू हो सकी. भारी हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही को बुधवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया.

इसके बाद केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा, जीएसटी के आर्थिक नजरिए से कई फायदे हैं. जीएसटी से ज्यादा टैक्स इक_ा होगा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस आर्थिक विकास नहीं चाहती है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की नीति देश की अर्थव्यवस्ता पर बोझ है. कांग्रेस को गांधी परिवार के बाहर का शासन स्वीकार नहीं है. जीएसटी पर एक तरह से राष्ट्रीय सहमति थी, लेकिन कांग्रेस अपने रुख से पलट रही है. कांग्रेस सदस्यों की नारेबाजी के बीच जेटली ने आरोप लगाया कि कांग्रेस विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के बहाने वह इस विधेयक को रोकना चाहते हैं.
लेफ्ट और कांग्रेस इसका जीएसटी बिल का जमकर विरोध कर रहे हैं. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपने सभी सांसदों से कहा है कि वह संसद में तब तक हंगामा जारी रखें, जब तक विवादों में फंसे तीनों बीजेपी नेताओं इस्तीफा न दे दें. साथ ही कांग्रेस ने कहा है कि इस सत्र में जीएसटी को नहीं लाया जाना चाहिए था.

विपक्षी दलों को साथ लाने की कोशिश में सरकार
सरकार टीएमसी, सपा को साथ लाने की कोशिश में है. साथ ही सरकार जेडीयू, बीजेडी, एआईएडीएमके को भी साथ लाने की कोशिश कर रही है. बिल को पास कराने की कोशिशों के चलते बीजेपी ने अगले तीन दिन के लिए व्हिप जारी किया है और सांसदों को संसद में उपस्थित रहने को कहा है. दरअसल, त्रस्ञ्ज बिल एक संविधान संशोधन बिल है. इसे पास होने के लिए आधे सदस्यों की मौजूदगी जरूरी है. साथ ही मौजूद सदस्यों में दो-तिहाई का बिल के पक्ष में वोट देना जरूरी है.

चर्चा नहीं हो सकती: आनंद शर्मा
पार्टी के राज्यसभा सांसद आनंद शर्मा ने कहा कि जीएसटी विधेयक पर चर्चा नहीं हो सकती, क्योंकि इस पर कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) में विचार नहीं किया गया है और न ही बीएससी ने इसके लिए समय निर्धारित किया है.

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