हमीदिया महाविद्यालय में जिला स्तरीय भाषण एवं श्लोक गायन प्रतियोगिता आयोजित

नवभारत न्यूज भोपाल, नभासं

संस्कृत के विकास के लिए राज्य शासन संस्कृति विभाग द्वारा आदि शंकर्राचार्य की प्रतिमा हेतु धातु संग्रहण एवं जन-जागरण अभियान के अंतर्गत शासकीय हमीदिया महाविद्यलाय में जिला स्तरीय भाषण एवं श्लोक गायन प्रतियोगिता आयोजित की गई,

जिसमें भोपाल जिले के विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया. ”अद्वैत वेदान्त दर्शन तथा जीव-जगत-जगदीश की सार्वभौमिक एकता” विषय पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता में हमीदिया महाविद्यालय के शुभम चौहान प्रथम रहे, उन्होने कहा कि ब्रम्हों जीवो ना परा: अर्थात् जीव ब्रम्ह से परे नही हैं एवं ब्रम्ह को विचारों एवं तर्को के आधार पर सिद्व नहीं किया जा सकता.

वही द्वितीय स्थान पर नूतन महाविद्यालय की अपर्णा शुक्ला रहीं, उन्होने कहा कि आदि शंकर्राचार्य का मत था कि ब्रम्ह और जीव की द्वेतानुभूति का निवारण करके ही उस परम्ब्रम्ह परमेश्वर की सत्ता को स्वीकार करना ही अद्वेतवाद है.

श्लोक गायन में अपर्णा प्रथम स्थान पर रहीं उन्होने आदि शंकर्राचार्य द्वारा रचित संस्कृतपदों एवं द्वितीय स्थान पर रहें नीरज शर्मा ने ”त्वदीय पाद पंकजम, नमामि देवी नर्मदे” (नर्मदाअष्ठक) का गायन किया।

प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय, एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को इनामी राशी रूपये 10 हजार की राशी एवं प्रमाणपत्र सहित जिला जनसंवाद कार्यक्रम में पुरस्कृत किया जावेगा। कार्यक्रम में अखंड ब्रम्हांड की सार्वभौमिक एकता पर डॉ. जे.एस.दुबे, कृष्णा यादव ने आभार व्यक्त किया.

दर्शकों की राय

संस्कृत के संवर्धन के लिए लोगों को भाषा को देवभाषा तक सीमित नहीं रखकर बोलचाल की भाषा के रूप में प्रयोग लाना चाहिये.
शुभम चौहान
छात्र हमीदिया कॉलेज

संस्कृत हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं, बिना संस्कृत के न देवताओं की परिकल्पना की जा सकती हैं. न ही हमारी धरोहरों की.
अर्पणा
छात्रा नूतन कॉलेज

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