ansariरबात(मोरक्को),  उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने आज कहा कि आधुनिक विश्व के सामने विविधता को अस्तित्वपरक वास्तविकता के रूप में स्वीकार करने और इसे व्यवहार में लाने के लिए पद्धतियों और प्रवृत्तियों को रूप देने की चुनौती है।

डॉ़ अंसारी ने यहां माेहम्मद वी विश्वविद्यालय में भूमंडलीकृत होते विश्व में विविधता के समायोजन-भारतीय अनुभव विषय पर व्याख्यान में कहा कि जटिल सामाजिक बनावट वाले देशों में राजनीतिक ढांचे और सामाजिक आर्थिक नीतियों में विविधता का समायोजन एक विकल्प नहीं बल्कि सकारात्मक आवश्यकता है, जिसकी उपेक्षा करने के अप्रिय परिणाम हो सकते हैं।

उन्होंने विषय की व्याख्या करते हुए कहा कि भारतीय मुसलमान देश के मजहबी बहुलवादी समाज में एक हजार से अधिक वर्षों से रह रहे हैं और उन्होंने आधुनिक भारत और बहुलवादी समाज के अस्तित्वपरक यथार्थ पर असर डाला है, जिसके आधार पर लोकतांत्रिक राज्य व्यवस्था और धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के ढांचे की बुनियाद पड़ी।

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