आज 10 सितंबर हिन्दी दिवस पर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल को विश्व हिन्दी सम्मेलन का 10वां आयोजन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी इस तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे. हिन्दी भाषा तो भारत की सबसे प्रमुख व संवैधानिक रूप से राष्टï्र भाषा है. प्रवासी भारतीयों ने विश्व के अनेकों भागों में हिन्दी को फैला और स्थापित कर दिया है. भारत के बढ़ते राजनैतिक व आर्थिक प्रभाव के कारण अनेक देशों के विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जा रही है. स्वतंत्रता संग्राम में ही हिन्दी को महात्मा गांधी ने भारत की राष्टï्रभाषा घोषित किया और कहा कि हिन्दी में ही भाषण दिया करेंगे.

10वें हिन्दी सम्मेलन के लिये भोपाल में जिस तरह का भव्य आयोजन और व्यवस्था की गयी है वह भी सम्मेलन के इतिहास में हमेशा उल्लेख की जायेगी. हिन्दी भाषा की विश्वव्यापी पहुंच के देखते हुए सन् 1973 में राष्टï्रभाषा प्रचार समिति की वर्धा में आयोजित सभा में यह विचार आया था कि हिन्दी का प्रचार-प्रसार विश्व स्तर पर भी किया जाना चाहिए. इस विचार को 2 साल में ही विश्व हिन्दी सम्मेलन संस्था का गठन कर मूर्तरूप दे दिया गया और पहला विश्व हिन्दी सम्मेलन 1975 में नागपुर में आयोजित हुआ. इसका स्वरूप इतना फैलता गया कि इसके अब तक के 10 सम्मेलनों में 3 तो भारत में हुए और 7 विश्व के अन्य देशों में संपन्न हुए. दूसरा सम्मेलन 1976 में मारिशस, तीसरा 1983 में दिल्ली, चौथा 1993 में मारिशस, पांचवा वेस्टइंडीज के देश ट्रिनीडाड-टुबैगा, 6वां 1999 में लंदन, 7वां 2003 में सूरीनाम, 8वां 2007 में न्यूयार्क, 9वां दक्षिण आफ्रीका में जोहान्सबर्ग और और अब यह 10वां सम्मेलन भोपाल में हो
रहा है.

संयुक्त राष्टï्र में सभी देश के प्रतिनिधि अपने देश की भाषा में बोलते हैं. भारत की तरफ से यहां अंग्रेजी में ही बोला जाता रहा. लेकिन इसका श्रेय प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी को जाता है कि संयुक्त राष्टï्र महासभा में उन्होंने अपना भाषण हिन्दी में दिया था और पहली बार वहां हिन्दी बोली गयी.
भोपाल केे 10वें सम्मेलन में 39 देशों के 1500 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं. इसमें 2500 लोगों को निमंत्रण भेजा गया है. इस सम्मेलन में विचार का केन्द्र यह होगा कि ‘हिन्दी के प्रभाव क्षेत्र को बढ़ाने के लिये करना क्या है.Ó एक विशेष मोबाइल एप तैयार हुआ है- ‘दृश्यमानÓ जिस पर हर 15 मिनिट में सम्मेलन का वीडियो अपलोड होगा जिसे दुनिया में कहीं भी देखा जा सकेगा.

सम्मेलन के अवसर पर गगनांचल नाम से 250 पेज की हिन्दी स्मारिका निकाली गयी है. आयोजन स्थल पर हिन्दी से संबंधित 17 प्रदर्शनियां आयोजित की गयी हैं. नागपुर में 1975 में हुए प्रथम सम्मेलन का शुभारंभ तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने ही किया था.

समापन दिवस 12 सितम्बर को हिन्दी के ख्यात कवि व लेखक के सुपुत्र अभिनेता श्री अमिताभ बच्चन करेंगे. हिन्दी में बच्चन परिवार का बड़ा
योगदान रहा.

राज्यों में जहां क्षेत्रीय भाषाओं का चलन रहे वही यह प्रयास अब सघन होने चाहिये. क्षेत्रीय भाषाओं को आपस में जोडऩे व संपर्क के लिये हिन्दी का प्रयोग होना चाहिये. अंग्रेजी को अब इस कार्य से हटाकर हिन्दी को स्थापित करना है.

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