sv2लखनऊ,  आगरा में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के नेता अरुण माहौर की हत्या का मामला गरमाता जा रहा है. रविवार को बीजेपी, वीएचपी व दूसरे संगठनों की ओर से आयोजित शोकसभा में जिस तरह के बोल बोल गए, उससे साफ है कि इस आक्रोश को और उबालने की तैयारी है.

मामला दलित की हत्या और गोकशी से जुड़ा होने के चलते बीजेपी ने इस पर आक्रामक रुख अपना लिया है.

वीएचपी नेता अरुण माहौर के सम्मान में रविवार को आगरा में शोकसभा आयोजित की गई थी. इसमें केंद्रीय मंत्री रामशंकर कठेरिया के साथ ही फतेहपुर सीकरी के सांसद बाबूलाल गौर, वीएचपी के राष्ट्रीय नेता, स्थानीय बीजेपी विधायक और नेता शामिल हुए.

शोक सभा में मंच से शोक के बजाय आक्रोश ज्यादा उकेरा गया. केंद्रीय मंत्री कठेरिया जहां लाठी उठाने की धमकी देने से नहीं चूके, वहीं उन्होंने ताकत बढ़ाने का भी आह्वान किया.

बाबूलाल गौर विशेष समुदाय के लोगों को चुनौती देते दिखे कि तारीख तय कर आमने-सामने हिसाब कर लें. बीजेपी के आगरा साउथ से विधायक योगेंद्र उपाध्याय कहते हैं कि हमने डीएम से मिल कर मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट को देने, परिवार को सुरक्षा, मुआवजे के नाम पर भेदभाव की शिकायतें दूर करने की मांग की है. कार्यकर्ता हर गली में शोक सभा आयोजित कर मसले को जोड़ेंगे. कोरी समाज में नरौरा में अस्थि कलश विसर्जित करने की परंपरा है, इसलिए वहां तक अस्थि कलश यात्रा भी आयोजित की जाएगी.

बता दें कि वीएचपी नेता अरुण माहौर दलित थे. बीजेपी यह सवाल लेकर लोगों के बीच जा रही है कि एक आत्महत्या पर पूरे देश में हंगामा खड़ा करने वाले इस दलित की हत्या पर चुप क्यों हैं? मुआवजे के सवाल को गरमाने के साथ ही बीजेपी और हिंदूवादी संगठनों गोरक्षा से भी पूरे मसले को जोड़ रहे हें. उनका कहना है कि जो पकड़े गए वह मोहरे हैं. इसके पीछे गोकशी का पूरा खेल है, जिसको रोकने पर ध्यान नहीं है.

हालांकि, बीजेपी विधायक योगेंद्र कहते हैं कि हमने शांति व्यवस्था कायम करने में मदद की है. मंशा राजनीतिक नहीं बल्कि न्याय दिलाने की है. मामले को बीजेपी विधानसभा में भी उठा चुकी है.

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