मध्यप्रदेश के सबसे बड़े और देश के बड़े घोटालों में शामिल व्यापमं की जाचं कहां और कैसे हो अब इसका निर्णय सुप्रीम कोर्ट में ही होगा. विपक्ष में बैठी कांग्रेस ने अपने राजनैतिक दायित्व को इस घोटाले में पूरी तौर निभा दिया. वह इसे राज्य के दायरे से बाहर राष्टï्रीय दायरे (नेशनल फोकस) में ले आयी. अभी तक शिवराज सिंह चौहान की भाजपाई राज्य सरकार इसे राज्य पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम तक सीमित रखे थी. लेकिन राजनैतिक दबाव में मामला गंभीर होता देख मध्यप्रदेश के हाईकोर्ट ने उसे अपनी निगरानी में ले लिया. इसी संदर्भ में स्वयं हाईकोर्ट ने भी एस.आई.टी. की जांच को सही ढंग से नहीं चलता देख उसे यह झिड़की और चेतावनी दी थी कि यदि एस.आई.टी. ने निष्पक्षता व साहस से जांच नहीं की तो हाईकोर्ट इस मामले को सीबीआई को सौंप देगा. इसके बाद ही जांच हाईकोर्ट के नियंत्रण में चल रही है. कांग्रेस के महामंत्री श्री दिग्विजय इस निगरानी वाली प्रक्रिया पर भी असंतष्टï होकर सुप्रीम कोर्ट गये थे और सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की निगरानी जांच पर पूरी संतुष्टिï व्यक्त करते हुए श्री दिग्विजय सिंह से धैर्य रखने और इस जांच पर विश्वास रखने को कहा. जांच इसी स्तर पर आगे बढ़ रही थी और कांग्रेस भी अपने राजनैतिक दायित्व इस घोटाले पर आगे बढ़ती रही. जांच लंबी चल रही थी और इस दौरान कई लोगों की मृत्यु हो गयी. कुछ मौतें स्वाभाविक लगीं लेकिन कुछ मौतें बड़ी ही रहस्यपूर्ण रहीं और जनमानस में यह शंका पैदा होने लगी कि जांच की ही मौत करने के लिए सत्ता पक्ष व लिप्त व्यक्तियों की साजिश से ये मृत्यु वास्तव में हत्यायें हैं. सरकार ने कुछ मौतों को आत्महत्या बताया. लेकिन अब स्वयं मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भी पत्रकार वार्ता में यह माना कि मध्यप्रदेश और राज्य के बाहर लोगों के मन में तरह-तरह के प्रश्न उठ रहे हैं. जनधारणा का भी महत्व होता है और वे उसके प्रति नतमस्तक हैं और यह मानते हैं कि अब सीबीआई जांच जरूरी हो
गयी है.

अब यह सुनिश्चित ही लगता है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सीबीआई की जांच को मंजूरी दे दे लेकिन सवाल निगरानी का उठेगा कि हाईकोर्ट की निगरानी चलती रहेगी या उसे भी सुप्रीम कोर्ट अपने हाथ में ले लेगा. कांग्रेस को इस जांच में राज्य की पुलिस एस.आई.टी. पर भरोसा नहीं है कि वह निष्पक्ष व साहस से काम कर पायेगी. लेकिन क्या हाईकोर्ट की निगरानी को भी कमतर व अविश्वसनीय माना जायेगा जिसे सुप्रीम कोर्ट पहले बिल्कुल ठीक कह चुका है.

अब सुप्रीम कोर्ट व्यापमं के मामले में इससे जुड़े सभी पहलुओं व पिटीशनों पर एक साथ विचार करने जा रहा है. इसमें कांग्रेस के श्री दिग्विजय सिंह चौहान की यह मांग है कि एस.आई.टी. की बजाय सीबीआई जांच करे वह सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो. साथ ही राज्य के गवर्नर श्रीराम नरेश यादव की भी इस घोटाले में लिप्तता पर सुप्रीम कोर्ट विचार करेगा. हाईकोर्ट राज्यपाल को संवैधानिक ‘इम्यूनिटीÓ दे चुका है. इस घोटाले पर कांग्रेस ने 16 जुलाई को ‘प्रदेश बंदÓ का आव्हान किया है. अब उसका पूरा जोर इस बात पर है कि जांच के चलते मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान पद त्याग करें या उन्हें हटा दिया जाए. अब लक्ष्य शिवराज सिंह हैं.

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