3congressभोपाल,3 अगस्त,नभासं. भाजपा द्वारा व्यापमं पर कर्मचारी संगठनों के साथ चर्चा का मामला तूल पकडऩे के बाद सोमवार को कांग्रेस ने भी संगठनों से सीधी चर्चा कर उन्हें इस मामले पर अपना पक्ष बताने का प्रयास किया.

कांग्रेस के साथ बैठक का मामला इस कदर तूल पकड़ा की उन्हीं संगठनों के लोगों को सीएम के साथ चाय पे चर्चा का बुलावा आया. कांग्रेस ने बैठक के दौरान व्यापमं घोटाले से जुड़े दस्तावेज का जिक्र करते हुए दस पेज का एक ड्राफ्ट सौंपा है.

ये संगठन आए
मप्र कर्मचारी कांग्रेस के अलावा राज्य वन सेवा संघ, एमपी एग्रो कार्पोरेशन कर्मचारी संघ, लिपिक वर्गीय कर्मचारी संघ, मप्र पेंशनर्स एसोसिएशन, इंटक समेत कई संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए. कांग्रेस की ओर से प्रदेश उपाध्यक्ष माणक अग्रवाल, मुख्य प्रवक्ता के के मिश्रा, युवा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुणाल चौधरी, जिला कांग्रेस अध्यक्ष पीसी शर्मा समेत कई पदाधिकारी मौजूद थे.
गौरतलब है कि भाजपा ने पिछले हफ्ते डिपो चौराहे पर दत्तोपंत ठेंगड़ी भवन में कर्मचारी नेताओं की बैठक ली थी. जिसमें भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री अरविंद मेनन और प्रदेश मंत्री तपन भौमिक व शिव चौबे कर्मचारी नेताओं से चर्चा के लिए मौजूद रहे थे. इसी बैठक में व्यापमं मामले से जुड़ी बहुचर्चित पुस्तक बांटी गई थी. जिस पर कांग्रेस ने टीटी नगर थाने में शिकायत तक की थी.
दबाव क्यों बनाया

बैठक में उपस्थित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों को व्यापम की वास्तविकता के कागजात देते हुए पार्टी के मुख्य प्रवक्ता के.के. मिश्रा ने कहा कि जब 9 जुलाई, 15 को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर इस घोटाले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई और मुख्यमंत्री सहित भाजपा के सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि अब दूध का दूध और पानी का पानी साफ नजर आयेगा, तब राज्य सरकार और भाजपा को कर्मचारी व श्रमिक संगठनों को मुख्यमंत्री का चेहरा चमकाने के लिए आगे आने के लिए आव्हान करने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या यह सीबीआई के प्रति अविश्वसनीयता है, सीबीआई पर दबाव बनाने का प्रयास है या सर्वोच्च न्यायालय का अपमान? स्पष्ट करना चाहिए.

Related Posts: