राज्य स्तर से राष्ट्रीय स्तर का घोटाला, हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट का मामला और जांच मध्यप्रदेश पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टीगेशन (एसआईटी) से सेन्ट्रल ब्यूरो आफ इन्वेस्टीगेशन (सीबीआई) की जांच हो गई. अब जांच केवल एडमीशन व नौकरियों की परीक्षाओं में हुए घपलों तक सीमित नहीं है बल्कि उन मौतों की भी होगी जो इसमें लिप्त लोगों की जांच के दौरान हो गयी हैं. कितने मरे इस पर भी शिवराज सरकार और विपक्ष की कांग्रेस के बीच ज्यादा-कम का मतभेद है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह संख्या 36 तक सीमित रखने का फैसला दे दिया है. इतनी ही संख्या आवेदक ने अपने पिटीशन में बताई है. बाकी मौतों पर शिवराज सरकार और कांग्रेस जांच और उनकी प्रक्रियाओं पर आगे भी उलझते टकराते रहेंगे. लेकिन जांच के पूरी होने तक कई और मौतें होने की संभावनायें हैं.
गवर्नर श्री रामनरेश यादव के मामले में केन्द्र सरकार उन्हें बनाये रखने या हटाने का जो भी निर्णय ले, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की तरफ से अभी इस मामले में 4 हफ्ते (एक महीना) का और समय लगेगा. गवर्नर को पक्ष बताने के लिये 4 माह का नोटिस दिया गया है. गवर्नर हाईकोर्ट से इस प्रकरण में न आने के लिये संवैधानिक ‘इम्यूनिटीÓ मांग और पा चुके हैं.
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान पद पर रहे या हट जाएं या हटा दिये जाएं यह मामला अदालती नहीं हो सकता. इस पर श्री चौहान, उनकी भारतीय जनता पार्टी और विरोध में कांग्रेस के बीच राजनैतिक खींचतान चलती ही रहेगी. पूरी संभावनायें हैं कि ललित मोदी प्रकरण को लेकर संसद में विपक्ष में बैठी कांग्रेस विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज और राजस्थान की मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे पर मोदी सरकार को घेरेगी और उसी में श्री शिवराज सिंह चौहान को भी व्यापमं के मामले में घसीट लिया जायेगा. राज्य विधानसभा में यह मांग और मामला उठना अवश्यंभावी है. श्री चौहान का कहना है कि कांग्रेस को ‘शिवराज फोबियाÓ है और हकीकत यह है कि व्यापमं ही व्यापक होता जा रहा है. अब जांच की भी जांच होगी. एस.आई.टी. की जांच को सी.बी.आई. जांचेगी. सी.बी.आई. के पूर्व डायरेक्टर श्री रंजीत सिन्हा ने मत व्यक्त किया है कि सी.बी.आई. एस.आई.टी. जांच के दस्तावेज परखेगी और खामी मिली तो नये सिरे से जांच होगी. अगर किसी को छोड़ा या बचाया गया तो उस पर केस दर्ज होगा. वहीं एक अन्य पूर्व सी.बी.आई. डायरेक्टर श्री जोगिन्दर सिंह ने मत व्यक्त किया है कि सी.बी.आई. को केस में कड़ी जोडऩा है. यह तो जांच का विषय हो ही जायेगा कि कहीं कड़ी को किसी को बचाने के लिए तोड़ा गया था क्या?
श्री चौहान नई जांच का स्वागत करते हुए इसे अपनी ‘अग्नि परीक्षाÓ कह रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि वे भी सीता की तरह इस परीक्षा में पवित्र ही निकलेंगे. उधर यह कांग्रेस के लिये राजनैतिक परीक्षा है. अगर जांच में श्री चौहान पाक-साफ निकले तो कांग्रेस ही दागदार हो जायेगी.

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