इलाहाबाद,  ज्योतिषपीठ-बद्रीकाश्रम को लेकर शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती और वासुदेवानंद सरस्वती के बीच चल रहे विवाद पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय आगामी 22 सितम्बर को फैसला सुनाएगा। उच्च न्यायालय के इस बहुप्रतीक्षित फैसले पर पीठ के करोड़ों भक्तों व अनुयायियों की निगाहें टिकी हुई हैं।

लम्बी बहस के बाद उच्च न्यायालय के दो न्यायाधीशों की खंडपीठ न्यायाधीश सुधीर अग्रवाल व न्यायाधीश के जे ठाकर ने गत तीन जनवरी को शंकराचार्य पद के विवाद पर अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था।

उच्चतम न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय को इस विवाद के शीघ्र निस्तारण का आदेश दिया था। उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुपालन में उच्च न्यायालय ने कई दिनों तक इस मामले की सुनवाई की। गौरतलब है कि इलाहाबाद की एक अदालत ने पांच मई 2015 को एक ऐतिहासिक फैसले में अपने को ज्योतिष्पीठ- बद्रीकाश्रम का वैध शंकराचार्य घोषित करने वाले स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती को अवैध घोषित कर दिया था।

यही नहीं यहाँ की निचली अदालत ने शंकराचार्य स्वरूपानंद के दावा को स्वीकार कर यह भी आदेश दिया था कि वासुदेवानंद सरस्वती न तो अपने को शंकराचार्य घोषित करेंगे और न ही शंकराचार्य पद के लिए विहित क्षत्र, चँवर व सिंहासन का प्रयोग ही करेंगे|

निचली अदालत के इस फैसले के बाद स्वामी वासुदेवानंद ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर निचली अदालत के आदेश पर रोक लगाने की माँग की। उच्च न्यायालय तथा बाद में उच्चतम न्यायालय ने भी उनकी अपील पर किसी भी प्रकार का अंतरिम आदेश देने से इंकार कर दिया। उच्च न्यायालय ने कहा कि वह इस मामले में अंतिम फैसला 22 सितम्बर को सुनाएगी।

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