नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश चीनी उद्योग के लिए मशहूर है लेकिन यहां इस उद्योग की हालत बहुत खस्ता है. एक ओर जहां चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का करोड़ों रुपये का बकाया है वहीं बैंक मिलों को कर्ज देने के लिए इच्छुक नहीं नजर आ रहे भूपेश भंडारी और साहिल मक्कड़ उत्तर प्रदेश के एक बड़े चीनी कारोबारी ने हाल ही में दिल्ली के उपनगरीय इलाके के एक बड़े अस्पताल में भर्ती होने का फैसला किया. उस कारोबारी के नाम पर वारंट जारी हो चुका था और उत्तर प्रदेश पुलिस के जवान उसके फार्म हाउस और कार्यालय में उसे तलाश रहे थे.

गिरफ्तारी से बचने के लिए उसे रात घर से बाहर बितानी थी और शायद उसे लगा कि अस्पताल इसके लिए बेहतर जगह होगी. लेकिन जैसे ही वह अस्पताल पहुंचा, यह देखकर चकित रह गया कि राज्य पुलिस के जवान पूरे अस्पताल परिसर में मौजूद थे. दरअसल कुछ ही देर पहले एक बड़े राजनेता उस अस्पताल में भर्ती हुए थे. बस फिर क्या था, चीनी कारोबारी वहां से तुरंत निकल गया.

उत्तर प्रदेश का चीनी उद्योग डर की जकड़ में है. राज्य सरकार के आदेश के चलते गन्ने की कीमत बढ़ी हुई है जबकि चीनी की कीमतों में लगातार गिरावट आ रही है. चीनी मिलों पर किसानों का भारी भरकम बकाया है. जाहिर सी बात है कि किसानों के सब्र का बांध टूट रहा है. कुछ मिलों का आरोप है कि उनके कर्मचारियों और परिजनों के साथ किसानों ने बदतमीजी भी की है. चूंकि चीनी और गन्ना दोनों आवश्यक जिंस अधिनियम के अधीन आते हैं इसलिए राज्य सरकार के पास अधिकार है कि वह बकाया भुगतान न करने वालों के विरुद्घ आपराधिक मामले की शुरुआत कर सके.

इसमें गिरफ्तारी भी संभव है. इंजीनियर और टेक्रीशियन मिलों को छोड़कर जा रहे हैं. हालात इतने बुरे हैं कि मिलों को ऐसे कर्मचारी खोजने तक में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है जो किसानों के भुगतान के लिए जिम्मेदार होता है. मिलों के निदेशक बोर्ड में शामिल होने से डर रहे हैं.

मवाना शुगर्स नामक एक कंपनी जिसके पास उत्तर प्रदेश में तीन मिलें हैं, के अधिकांश निदेशक छोड़कर चले गए हैं. पिछले दिनों मवाना शुगर्स ने राज्य सरकार को सूचित किया कि प्रशिक्षित और अनुभवी कर्मचारियों के अभाव में वह आगे कंपनी को चलाने में सक्षम नहीं हैं. कंपनी ने पत्र में लिखा कि अब उसके पास कोई निदेशक या वरिष्ठï अधिकारी काम नहीं करना चाहता है क्योंकि वे सभी बहुत असुरक्षित महसूस कर रहे हैं.

यहां पर जोखिम एकदम साफ नजर आ रहा है. मिलें अपनी मर्जी से बंद नहीं हो सकती हैं. वे केवल तभी बंद हो सकती हैं जब जिला मजिस्ट्रेट उनको ऐसा करने की अनुमति दे. इस कानून का अतिक्रमण आपराधिक मामले को न्योता दे सकता है. उत्तर प्रदेश सरकार ने मवाना शुगर्स को कहा कि उसका काम अवैध है और ऐसा करने से किसानों के हितों को नुकसान पहुंचेगा. उत्तर प्रदेश के गन्ना आयुक्त एस सी शर्मा के मुताबिक कंपनी ने अपना काम दोबारा शुरू करने की इजाजत दे दी है.

राजनीतिक दलों ने इससे भी लाभ हासिल करने का मन बना लिया है. भाजपा नेता लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने गुमराह मिल मालिकों के खिलाफ कदम उठाने की मांग करते हुए विधानसभा में राज्य सरकार से कहा कि ऐसे मिल मालिकों को तत्काल पुलिस हिरासत में ले लिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि जेल में जब मच्छर उन पर हमला करेंगे तो उनकी पत्नियां पैसे लेकर तत्काल आएंगी.

गत वर्ष 5 सितंबर को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मिलों से कहा था कि वे अपने चीनी के स्टॉक की बिक्री करें और वर्ष 2013-14 के बकाया भुगतान को पूरा करें. उस वक्त यह राशि करीब 4,600 करोड़ रुपये थी. मिलें ऐसा करने में चूक गईं और तब राष्टï्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक वी एम सिंह ने मिलों पर न्यायिक अवमानना का आरोप लगाया. 25 फरवरी को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने जिलाधिकारियों को आदेश दिया कि वे किसानों को भुगतान में चूक करने वाली मिलों के खिलाफ सख्त कदम उठाएं.

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