लखनऊ. इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश की पृष्ठïभूमि में चीनी मिलों ने संयुक्त रूप से अब तक मात्र 17 प्रतिशत बकाया भुगतान किया है. उच्च न्यायालय ने चीनी मिलों को 15 जुलाई तक उन पर बकाया रकम का 75 प्रतिशत तक भुगतान करने को कहा था. बकाया रकम के भुगतान के लिए दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश 27 मई को आया था. उच्च न्यायालय ने चीनी मिलों को बकाया रकम का 25 प्रतिशत, 50 प्रतिशत और 75 प्रतिशत रकम का भुगतान क्रमश: 15 जून, 30 जून और 15 जुलाई तक करने का आदेश दिया था.

उस समय निजी मिलों पर कुल बकाया रकम करीब 6,000 करोड़ रुपये थी. इस समय चीनी मिलों पर कुल बकाया रकम करीब 5,000 करोड़ रुपये है, जिनमें 341 करोड़ रुपये ब्याज का भुगतान शामिल नहीं है. आदेश के अनुसार निजी चीनी मिलों को 15 जुलाई तक 4,500 करोड़ रुपये का ही भुगतान करना था, लेकिन इन्होंने संयुक्त रूप से मात्र 17 प्रतिशत बकाया रकम का ही भुगतान किया है.

हालांकि विभिन्न मिलों के बकाया भुगतान में काफी अंतर है, कुछ ऐसी मिलें भी हैं जिन्होंने गन्ना खरीद के लिए प्रति क्विंटल 15-16 रुपये ही भुगतान किए हैं. कुछ ऐसी भी मिलें हैं जिन्होंने 240 रुपये क्विंटल के हिसाब से शत-प्रतिशत बकाया का भुगतान कर चुके हैं.

उच्च न्यायालय आगामी 28 जुलाई को फिर मामले की सुनवाई करेगा. सरकार को भी बकाया की स्थिति के बारे में न्यायालय को सूचना देते रहने के और भुगतान नहीं करने वाली मिलों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी देने के लिए कहा गया है. मुख्य सचिव चीनी मिल मालिकों और अधिकारियों के साथ से दो बैठकें कर चुके हैं. अगर राज्य में गन्ने की 280 रुपये प्रति क्विंटल पर विचार करें तो कुल बकाया रकम 8,200 करोड़ रुपये हो जाती है. इस बीच, चीनी उद्योग उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में इस क्षेत्र की समस्याओं का निदान हो सकेगा.

चीनी मिल संघ के सचिव दीपक गुप्ता ने बताया चीनी क्षेत्र की समस्या केवल उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं है बल्कि पूरे देश में सभी मिलें चीनी की गिरती कीमतों की समस्या का सामना कर रहे हैं.ज् हाल में ही खाद्य मंत्री को भेजे एक पत्र में यूपीएसएमए ने गन्ने की ऊंची कीमतें का हवाला देते हुए 2015-16 में पेराई बंद रखने का संकेत दिया था.

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