भारत का शक्कर उद्योग इस साल बम्पर उत्पादन होने की वजह से बम्पर संकट में आ गया है और सरकार से मदद की मांग कर रहा है. इस साल शक्कर का रिकार्ड उत्पादन होने की संभावना है.

शक्कर मिलों के सामने यह संकट आ गया है कि अधिक उत्पादन से शक्कर के भाव तो गिर जायेंगे लेकिन शक्कर की उत्पादन लागत उतनी ही बनी रहती है. शक्कर मिल मालिकों को यह चिंता हो गयी कि इन हालातों में गन्ना किसानों को उनसे खरीदे गन्ने की कीमतों का भी पूरा भुगतान नहीं कर पायेंगे.

भारत में इस समय शक्कर मिलों व शक्कर उत्पादन के तीन बड़े राज्य है. पहला महाराष्ट्र , दूसरा उत्तर प्रदेश और तीसरा कर्नाटक.

मध्यप्रदेश में भी कुछ शक्कर मिलें हैं लेकिन अभी उनका स्थान शक्कर राज्यों में नहीं होता है. हालांकि कृषि के हिसाब से राज्य में गन्ना का उत्पादन शक्कर मिलों को बढ़ाने के लिये सभी उपयुक्त सुविधाएं व परिस्थितियां मौजूद है.

उससे यहां सोयाबीन, गेहूं, धान व अन्य सभी फसलों की तरह गन्ना की खेती को बढ़ावा देकर इसे भी भारत के शक्कर राज्यों में खड़ा किया जा सकता है और गन्ना इस राज्य में किसानों के लिये केश क्राप हो सकता है. यहां संभागीय कमिश्नरों के अलावा दो और कमिश्नर होते हैं- एक लेबर कमिश्नर और दूसरा कृषि विभाग के अंतर्गत केन कमिश्नर.

लेकिन मध्यप्रदेश में केन कमिश्नर का पद बहुधा खाली पड़ा रहता है. यदा कदा उस पर किसी की नियुक्ति हो जाती है. मुख्यमंत्री श्री चौहान कृषि और औद्योगिक विकास के लिये सक्रिय है. उन्हें मध्यप्रदेश को शक्कर मिलों और गन्ना को यहां केश क्राप के रूप में स्थापित करना चाहिए.

इस साल शक्कर में अग्रणी राज्य महाराष्ट्र में इस साल शक्कर का उत्पादन अत्याधिक बढक़र 42 लाख टन से बढक़र 106 लाख टन होने जा रहा है. इसके ही साथ गन्ना का भी बम्पर उत्पादन हो गया. राज्य में गन्ने की औसत उपज प्रति हेक्टेयर 80 टन से बढक़र 106 टन हो गई है. उत्तरप्रदेश में 95.4 लाख टन और कर्नाटक में 35.5 लाख टन हो गई है.

इस्मा (इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन) ने कहा है कि 534 शक्कर मिलों में से 193 शक्कर मिलों ने गन्ना पिरायी बंद कर दी है और शेष 331 कुछ ही दिनों में गन्नों की पिरायी बंद कर देंगे. इस्मा ने 2017-18 का शक्कर उत्पादन का अनुमान 295 टन कर दिया है.

वर्ष 17-18 में शक्कर का उत्पादन 49 प्रतिशत बढ़ गया है जो बहुत बड़ी छलांग और उपलब्धि तो है लेकिन मिल उत्पादन गन्ना के उत्पादन में बम्पर वृद्धि अब मिलों से सम्हाले नहीं सम्हल रही है. शक्कर के निर्यात में स्थिति आ गयी है कि वहां केंद्र सरकार ने तो 20 लाख टन शक्कर निर्यात की अनुमति दे देते है. वही अंतराष्ट्रीय बाजारों में शक्कर कीमतें कम रहने से एक्सपोर्ट भी संभव नहीं हो रहा.

विपुल उत्पदान के कारण शक्कर मिलों पर गन्ना किसानों की भुगतान राशि का बकाया 16,200 करोड़ रुपया हो गया है. इस्मा ने कहा है कि घरेलू बिक्री से कम आमदनी होने और विश्व बाजारों में शक्कर के भाव…. होने से निर्यात न हो पाने के कारण शक्कर मिलें समय पर गन्ना किसानों को भुगतान करने के लिये पर्याप्त धन राशि नहीं जुटा पा रही है. इस्मा ने सरकार से गुहार लगायी है. शक्कर मिलों ने देश को रिकार्ड उत्पादन करके तो दे दिया लेकिन उनमें जो संकट उन पर आ रहा है उसके लिये उनके लिये वित्तीय….. व्यवस्था बनायी जाए.

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