पाकिस्तान में नेशनल असेम्बली व प्रांतीय असेम्बलियों के आम चुनाव सिर पर आ गये हैं. सत्ता से हटे और जेल में बैठे जनरल मुशर्रफ तमाम नवाज विरोधी छोटी पार्टियों का मोर्चा बनाने की पहल कर रहे है. इमरान की तहरीके पाकिस्तान के पास उत्तर-पश्चिम प्रांत की असेम्बली कब्जे में है. वहां के चुनाव में भारत का विरोध व काश्मीर सभी दलों का मुख्य एजेंडा व चुनाव घोषणा पत्र होता है. प्रधानमंत्री श्री नवाज शरीफ भी अपनी सत्ता बचाने व पुन: पाने के लिये पूरी कोशिशों में लगे है. घरेलू मोर्चे पर उन्होंने आतंक विरोधी कार्यवाही लगभग रोकते हुए उनसे बातचीत का रवैया अख्तयार किया हुआ है.

इसी माहौल में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री श्री नवाज शरीफ अमेरिका के दौरे पर गये हुए है ताकि भारत विरोधी एजेंडा आगे बढ़ा कर पाकिस्तान के चुनावों की भूमिका में अपनी ताकत बढ़ा सके. लेकिन दुर्भाग्य ने यहां उनका पीछा नहीं छोड़ा.
राष्टï्रपति श्री बराक ओबामा ने श्री शरीफ से कह दिया कि भारत की तरह न तो पाकिस्तान से सिविल न्यूक्लियर एग्रीमेंट किया जायेगा और न ही उसकी वायुसेना को एफ-16 फाइटर प्लेन दिये जा सकते है.

यू.पी.ए. के शासन काल में भारत के प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह और राष्टï्रपति जार्ज बुश ने दोनों देशों के बीच सिविल न्यूक्लियर एनर्जी एग्रीमेंट किया था जिसके तहत अमेरिका भी भारत में अन्य देशों की तरह परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगायेगा. साथ ही रक्षा के क्षेत्र में भारत के साथ संबंधों को गहरा करते हुए भारतीय सेनाओं के लिये अतिआधुनिक भारी भरकम मिलीट्री ट्रांसपोर्ट हाक्युलियन प्लेन दिये हैं.

पाकिस्तान भी यह चाहता है कि अमेरिका उसे भी परमाणु ऊर्जा संयंत्र और उसकी वायुसेना के लिए एफ-16 फाइटर प्लेन दे. लेकिन श्री नवाज शरीफ से कह दिया गया है कि ये दोनों उसे नहीं दिये जा सकते. साथ ही सिनेट की एक मीटिंग में उनसे कहा गया है कि वे आतंकी संगठन अलकायदा, लश्करे-ए-तैयबा व हक्कानी के विरुद्ध निर्णायक फौजी कार्यवाही करने के अपने वायदे को पूरा करके दिखायें. लेकिन श्री नवाज शरीफ ने आने वाले चुनावों के संदर्भ में फिलहाल अपनी कार्यवाही में ढील देकर उनसे बातचीत का प्रस्ताव दिया है. लेकिन अमेरिका इससे संतुष्टï नहीं है.

साथ ही श्री नरेन्द्र मोदी का एक रवैया भी अनायास श्री नवाज शरीफ के गले पड़ गया. श्री मोदी ने संयुक्त राष्टï्र में अपना भाषण हिन्दी में दिया. इसके मद्देनजर पाकिस्तान के लोग श्री नवाज से पूछ रहे हैं कि उन्होंने संयुक्त राष्टï्रसंघ में अंग्रेजी में भाषण क्यों दिया- उर्दू में क्यों नहीं बोले.
अमेरिका को यह भी अंदेशा हो रहा है कि चुनावी चकल्लस में पाकिस्तानी आतंकी संगठन अपना प्रभाव बढ़ा लेंगे और उन दिनों उनके खिलाफ फौजी कार्यवाही में ढील दी जायेगी.