मध्यप्रदेश के नगरीय विकास के लिये 1428 करोड़ रुपयों की योजना अपने ढंग की सबसे बड़ी योजना है. इसमें नगरीय संरचना पर पूरा ध्यान केंद्रित किया गया है. जिन नगरों का पर्यटन व धार्मिक महत्व है उनके विकास में उनके स्वरूप व उसी तरह के विकास को बढ़ाया जायेगा. नगरीय विकास के लिये राज्य शासन वित्तीय आवंटन में 30 प्रतिशत राशि सब्सिडी और 70 प्रतिशत राशि कर्ज के रूप में देगी.

इसी संदर्भ में राज्य नगर पालिका सेवा को नया नाम मध्यप्रदेश राज्य प्रशासनिक सेवा दिया गया है इसके तहत नगरपालिकाओं के लिये एक डायरेक्टर, 14 ज्वाइन्ट डायरेक्टर, 84 प्रथम श्रेणी के चीफ म्युनिसिपल आफिसर, 107 द्वितीय श्रेणी के आफिसर व 267 तृतीय श्रेणी के आफिसरों के पद बनाए गये हैं. इससे यह लाभ होने की उम्मीद है कि अब म्युनिसिपल सेवाओं में प्रशासकीय गरिमा और कार्यप्रणाली भी व्यवस्थित हो जायेगी. अभी तक नगरपालिकाओं की भर्ती में नेताओं के द्वारा भरे गये लोग ही ज्यादा हो जाते हैं और काम भी बेतरतीब होता रहता है. अधिकांश सफाई कर्मी काम करते ही नहीं हैं. कुछ पार्षदों व अधिकारियों के घर का काम करते हैं. सेवाओं के पुनर्गठन से यह अव्यवस्था व्यवस्था में परिवर्तित हो जायेगी.

राज्य की सड़कों का बजट तो 2003 में 600 करोड़ का था, अब 28 हजार करोड़ रुपयों का हो गया है. अब यह और सुनिश्चित किया जाए कि वे सड़कें निर्धारित मापदंड की होंगी और टिकने वाली होंगी.

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