pranabनई दिल्ली,   देश के शिक्षण संस्थानों की रैंङ्क्षकग और शिक्षा का स्तर सुधारने का ख्वाब तभी पूरा हो सकेगा, जब ‘समान राष्ट्रीय शिक्षा नीतिÓ लागू होगी और शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता आएगी.

राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘इन रेजिडेंस’ कार्यक्रम में हिस्सा ले चुके पुरस्कार विजेता ज्यादातर शिक्षकों का तो कम से कम यही मानना है। गत 21 मई से 27 मई तक आयोजित ‘इन रेजिडेंस’ कार्यक्रम के समापन अवसर पर ज्यादातर शिक्षकों ने देश में एक समान शिक्षा नीति की वकालत की है। कार्यक्रम के समापन अवसर पर मीडिया से मुखातिब राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर पुरस्कार विजेता शिक्षकों ने शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के लिए प्रयास किये जाने की आवश्यकता जताई।

राष्ट्रपति भवन की जीवंतता के गवाह बने पुरस्कार विजेता शिक्षकों में गुजरात की राजधानी गांधीनगर स्थित एमबी पटेल अंग्रेजी माध्यम स्कूल की हिन्दी शिक्षिका डॉ. वर्षा भूपिन्द्र पारिख भी शामिल थीं, जिन्हें गुजरात सरकार के अलावा राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है।

देश की शिक्षा-व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन की वकालत करने वाली डॉ. पारिख ने शिक्षा क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त करने की आवश्यकता तो जताई ही, इसमें पारदर्शिता लाने पर भी बल दिया।

उन्होंने कहा कि देश में समान शिक्षा प्रणाली लागू की जानी चाहिए, ताकि पाठ्यक्रमों में अंतर का खामियाजा प्रतियोगिता परीक्षाओं में विद्यार्थियों को न भुगतना पड़े। उनकी इस बात का समर्थन जम्मू के कालूचक स्थित हाईस्कूल की प्रधानाध्यापिका किरण राजपूत, तेलंगाना से आए डॉ. एस वेंकट राजू ओर मिजोरम की राजधानी एजॉल स्थित गवर्नमेंट मिजो हाईस्कूल के शिक्षक एल. होआन्सेल ने भी किया। उन्होंने ‘इन रेजिडेंस’ कार्यक्रम के अनुभवों से अवगत कराते हुए राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से अपील की कि वह इस कार्यक्रम में देश के सभी राज्यों के शिक्षकों को मौका देंगे।
उन्होंने इस कार्यक्रम का दायरा बढ़ाने की वकालत भी की। श्रीमती राजपूत ने ‘इन रेजिडेंसÓ कार्यक्रम के माध्यम से प्राप्त अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि वह राष्ट्रपति की मेजबानी में राष्ट्रपति भवन में एक सप्ताह मेहमान की तरह बिताएंगी।

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