केंद्र की भाजपाई प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी सरकार की नीति जन सेवा न होकर उसे बेचना हो गया. स्वच्छता व प्राथमिक, मिडिल शिक्षा के नाम पर वह पहले ही जनता की सभी दैनिक वस्तुओं पर सर्विस टैक्स बढ़ा चुकी है. रेल विकास के नाम पर रेल किराये में वृद्धि हो
गयी है.

उच्च शिक्षा पर जबरदस्त प्रहार किया है. फीस को दुगनी से भी ज्यादा बढ़ा दिया गया. अब आई.आई.टी. और मेडिकल कालेजों में शिक्षा की फीस वृद्धि 90,000 से बढ़ाकर 2 लाख कर दी गयी है. सरकार की उच्च शिक्षा नीति में इतनी विसंगतियां और विकृतता आ गयी है कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भ्रम की स्थिति निर्मित हो गयी है. मोदी जी कहते हैं देश में इंजीनियरों व डॉक्टरों की भारी कमी है. इसमें छात्रों की भर्ती स्कूल व कॉलेजों की तरह सामान्य तौर पर नहीं होती है. इनमें शिक्षा की परीक्षा पास करने के बाद श्रेष्ठïता भी होनी चाहिए और उसकी भी परीक्षा के लिये भर्ती का इम्तहान देना होता है. होने को यह भी होता है कि ‘व्यापमंÓ जैसे घोटालों के जरिये न सिर्फ परीक्षा उत्तीर्णता बेची जाती है बल्कि उनकी मेरिट लिस्ट भी बेची-खरीदी गयी है.

यह भी सामने आ चुका है कि मेडिकल व इंजीनियरिंग कॉलेजों में पूरी सीटें नहीं भर पा रही हैं. कई ऐसे संस्थान घाटा व छात्र क्षमता न मिलने के कारण बन्द हो रहे हैं. हाल ही एक उच्च समिति ने कहा कि मध्यप्रदेश में अब और डेन्टल कालेज नहीं खोले जाने चाहिए. कई दंत चिकित्सक बेकार घूम रहे हैं. हर डॉक्टर निजी प्रेक्टिस व इंजीनियर निजी व्यवसाय नहीं लगा सकता.
डॉक्टर व इंजीनियरों की कमी भी है, उनकी बेरोजगारी भी सामने आ रही है. कुल मिलाकर वास्तविकता ही पता नहीं चल रही है.

उच्च शिक्षा में फीस दुगनी कर देने से सामान्य वर्ग इन शिक्षाओं से वंचित हो जायेगा. यह केवल आज धनाढ्य वर्ग के लिये ही बचेगा. वे तो इनमें भर्ती व सीट व्यापमं जैसे कारनामों में खरीद ही लेते हैं.

लीपापोती के लिये यह जरूर कहा जा रहा है. निम्र आय वर्ग व आरक्षित वर्ग के छात्रों को फीस माफ भी रहेगी. बैंकों से ब्याज मुक्त ऋण दिलाया जायेगा. बजाय इसके देश को मेडिकल, इंजीनियरिंग की शिक्षा को कम से कम खर्च पर सुलभ रखना चाहिए. एक तरफ फीस बढ़ा रहे हैं और दूसरी ओर रियायतें बता रहे हैं. सांसदों व विधायकों की वेतन भत्तों में बेतहाशा वृद्धि हो रही है और उच्च शिक्षा की फीस भी दुगनी से ज्यादा बढ़ा दी.

सड़क, शिक्षा व स्वास्थ्य सरकार में जनसेवा का मूल कार्य है. अभी यही सरकार की मूल आमदनी बन गये हैं.

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