कांग्रेस अभी तक इस नीति पर चल रही थी कि चुनावों में स्पष्टï संकेत होने के बाद भी चुनावों में किसी को प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री का चेहरा बनाकर नहीं उतारती थी. गत लोकसभा चुनावों में भी प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह के आगे पद पर नहीं बने रहने की घोषणा के बाद जाहिर तौर पर श्री राहुल गांधी ही आगे थे फिर भी उनका नाम अधिकृत रूप से नहीं किया गया था. हर चुनाव में यही कहा जाता रहा कि चुनाव के बाद संसदीय या विधायक दल ही नेता का चयन करेगा.

आमतौर पर यह होता रहा कि संसदीय या विधायक दल बहुमत आने पर एक प्रस्ताव पारित कर पार्टी अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी को नेता चुनने का अधिकार दे देते थे. उत्तरप्रदेश अब उत्तराखंड के अलग राज्य बन जाने से क्षेत्र के हिसाब से दूसरे नम्बर का सबसे बड़ा राज्य हो गया है और राजस्थान प्रथम है. लेकिन जनसंख्या के हिसाब से उत्तरप्रदेश सभी देश का सबसे बड़ा राज्य है जहां लोकसभा व विधानसभा में सबसे ज्यादा सीटें हैं.

उत्तरप्रदेश आजादी से पहले से आजादी के बाद 60 के दशक तक पूरे भारत के साथ-साथ कांग्रेस का सबसे बड़ा गढ़ रहा है. लेकिन कांग्रेस की गिरती दशा में उत्तरप्रदेश की राजनीति में भी वह काफी पीछे चली है. आज वह एक अखिल भारतीय पार्टी भाजपा और दो क्षेत्रीय पार्टियों समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी से भी पीछे विधान… में दो डिजिट की चौथे नम्बर की पार्टी बनी हुई है. यहां भारतीय जनता पार्टी का भी उत्थान के बाद अवसान भी हुआ है. कभी वर्तमान में केन्द्रीय गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह उत्तरप्रदेश में भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री रहे हैं. वर्तमान में मध्यप्रदेश के राज्यपाल श्री रामनरेश यादव भी 1977 में उत्तरप्रदेश में 1977 में जनता पार्टी सरकार के मुख्यमंत्री रहे हैं.

गत लोकसभा चुनाव में एक करिश्मा यह जरूर हुआ कि वहां भारतीय जनता पार्टी ने अप्रत्याशित रूप से 80 में से 73 सीटों पर जीत दर्ज की. कांग्रेस की पिछली 12 सीटों की जगह केवल 2…. सीटें- रायबरेली से सोनिया गांधी और अमेठी के श्री राहुल गांधी ही जीत पाये. राजनैतिक उतार-चढ़ाव में कभी ऐसा भी हुआ है कि भारतीय जनता पार्टी को लोकसभा चुनावों में पूरे भारत में 2 सीटें ही मिली थीं. ऐसे परिणाम तगड़ा झटका तो होते हैं पर वे निर्णायक नहीं होते. इस समय उत्तरप्रदेश की अखिल भारतीय पार्टियां कांग्रेस व भारतीय जनता पार्टी हैं और दो क्षेत्रीय स्तर की पार्टियां समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टियां इन दिनों सत्ता की पार्टियां बनीं हुई हैं. वहां की जनता इन दोनों पार्टियों के बीच ही सत्ता अदल-बदल करती आ रही है. इन दिनों मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी सत्ता में है और उनके बेटे अखिलेश सिंह मुख्यमंत्री हैं.

लेकिन कांग्रेस इस बार इस इरादे से अगले साल 2017 में होने वाले चुनावों में आ रही है कि उसे उत्तर प्रदेश में खोई हुई सत्ता और पार्टी की हस्ती को वापस पाना है. उसने अभी से यह घोषणा कर दी आगामी विधानसभा चुनाव पार्टी में पार्टी की नेता और सत्ता पाने पर मुख्यमंत्री श्री शीला दीक्षित होंगी. वे जन्म से पंजाब राज्य की हैं और सिख हैं. शादी उन्होंने उत्तर प्रदेश के एक आई.ए.एस. अधिकारी श्री विनोद दीक्षित से की थी और उत्तर प्रदेश की हो गयी हैं. उनके पति अवश्य शासकीय सेवा में थे, लेकिन परिवार कांग्रेस के राजनेताओं का रहा. उनके ससुर श्री उमाशंकर दीक्षित कांग्रेस के अखिल भारतीय स्तर के नेता रहे. वे केंद्रीय मंत्री और राज्यपाल भी रहे. वे स्वयं उत्तर प्रदेश की कन्नौज सिटी से कांग्रेस की लोकसभा सदस्य रही हैं.

वे दिल्ली में कांग्रेस की रिकार्ड 15 साल तक लगातार मुख्यमंत्री रहीं. दिल्ली में ही उनका बेटा संदीप दीक्षित लोकसभा सदस्य भी रहे.

अभी तक यह हवा व मांग चल रही थी कि उत्तरप्रदेश में कांग्रेस का नेतृत्व व मुख्यमंत्री पर चेहरा प्रियंका गांधी को बनाया जाए, लेकिन बड़ी खामोशी के साथ कांग्रेस ने यह तय किया है कि राज्य में कांग्रेस का नेतृत्व युवा नेता और फिल्म अभिनेता राजबब्बर को सौंपा जाए और उम्र में वरिष्ठï 78 साल की श्रीमती शीला दीक्षित को भावी मुख्यमंत्री के रूप में पेश कर पार्टी प्रदेश का चुनाव लड़ेगी. कांग्रेस नीतिगत रूप में जातीय समीकरण की राजनीति नहीं करती है, लेकिन चुनाव में स्वयं ही श्रीमती दीक्षित ब्राह्मïण मतदाता जो 12 प्रतिशत हैं, उन्हें प्रभावित करेगी.
काफी समय पहले श्रीमती सुचेता कृपलानी दिल्ली में कांग्रेस की मुख्यमंत्री रही हैं और बाद में वे उत्तरप्रदेश में कांग्रेस सरकार की मुख्यमंत्री बनीं.