26as10भोपाल, 26 जुलाई. नभासं. रविवार को भोपाल के गांधी भवन मे ट्रेड यूनियनों व कर्मचारी संगठनों का संयुक्त मध्य प्रदेश राज्य कन्वेंशन सम्पन्न हुआ. पूरे प्रदेश से आए 600 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से एक घोषणापत्र पारित किया.

घोषणापत्र मे पिछले एक वर्ष में ही केंद्रीय सरकार के समर्थन से राज्य सरकारों द्वारा बुनियादी श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी परिवर्तन लाने की भत्र्सना की गई. हाल ही में म.प्र. विधानसभा में पारित किये गये मध्य प्रदेश श्रम कानून(संशोधन व अन्य प्रावधान) अधिनियम 2015 को कन्वेंशन ने काला कानून मानते हुए इसे वापस लेने की मांग की. कन्वेंशन को विभिन्न संगठनो के राष्ट्रीय व प्रदेश के नेताओ ने सम्बोधित किया. सीटू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए के पद्मनाभन ने कहा कि केन्द्र और राज्यों की सरकारें उद्योगपतियों से चर्चा करके, उनके द्वारा उठाई गई मांगों के अनुसार श्रम कानून बदलने में लगी हुई है.जबकि त्रिपक्षीय वार्ताओं में सभी श्रमिक संगठनों से बात करने और उनकी मांगों को सुनने से भी बच रही है. उन्होने कहा कि अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार पिछले 20 साल में 63 देशों में श्रम कानूनों में आये बदलावों से रोजगार पैदा नहीं हुए. इसके बावजूद सरकार श्रम कानून बदलने को आमादा है. उन्होने आव्हान किया कि 2 सितंबर को देश के सभी संगठित-असंगठित श्रमिकों को हड़ताल कामयाब करके सरकारों की इन श्रम विरोधी नीतियों को रोकना है. एटक के राष्ट्रीय सचिव डीएल सचदेव ने अपने संबोधन मे कहा कि कम्पनियों और उद्योगपतियों के दबाव में श्रमिक संगठनों के पंजीकरण में तरह-तरह के अडंगे लगाये जा रहे हैं और नेतृत्व करने वालों को नौकरी से निकालने और पुलिस से प्रताडि़त करने का काम हो रहा है. अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के प्रस्तावों को नकार दिया गया है.

भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश महासचिव के पी सिंह ने कहा कि जो सरकारें श्रमिकों की एकता को विखंडित करना चाहती हैं, वे इसमें कामयाब नहीं होंगी. 2 सितंबर की हड़ताल को हम जन आंदोलन में बदलने के लिये आगे बढ़ रहे है. बीएमएस सहित सारे श्रमिक संगठन अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता से ऊपर उठकर केन्द्र और राज्य सरकारों की श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ मुँह तोड़ जवाब देने के लिये एकजुट हैं. उन्होने कहा कि श्रम कानूनों में जो भी परिवर्तन किये जा रहे हैं, वे निश्चित रूप से मजदूर विरोधी हैं. इंटक के प्रदेश अध्यक्ष आरडी त्रिपाठी ने कहा कि 70 करोड़ से ज्यादा जनता 20 रुपये से भी कम पर जिंदा हैं, लेकिन सरकार 57-58 श्रम कानूनों को खत्म करके श्रम विरोधी 3-4 कानून चाहती है. मध्यप्रदेश में श्रम संगठनों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है. कन्वेंशन को एटक के राज्य उपाध्यक्ष अजीत जैन, बीएमएस के राज्य सचिव गणेश मिश्र, इंटक के राज्य उपाध्यक्ष रामराज तिवारी, एचएमएस के राज्य सचिव अशोक पाण्डे, सेवा की जिला समन्वयक बसंती मालवीय, एआईयूटीयूसी के रूपेश जैन, बैंक कर्मचारियो के प्रदेश महासचिव व्ही के शर्मा, बीमा कर्मचारियो के प्रांतीय अध्यक्ष एन चक्रवर्ती, एचएमएस के सत्यवीर सिन्ह ने भी सम्बोधित किया. संचालन एटक के प्रदेश महासचिव रूप सिंह चौहान एवं आभार बीएमएस के राज्य अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश तिवारी ने व्यक्त किया.

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