mp3भोपाल,   मध्यप्रदेश के सीधी जिले में स्थित संजय टाइगर रिजर्व में इन दिनों गाँवों के विस्थापन की प्रक्रिया जारी है। दुबरी अभयारण्य से गाँव कंजरा और बहेरवार का विस्थापन किया जा चुका है।

गाँव गाइन्दवार, दुधमनिया एवं भैंसाडोल का अवार्ड पारित कराकर कलेक्टर के साथ संयुक्त खाता खोलने की प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा पाँच गाँव निमिहा, पनखोरा, गिजोहर, मगरा एवं हथिबंधा में ग्रामीणों के सहमति पत्र एवं दस्तावेज आदि का संकलन, निरीक्षण और सर्वेक्षण का काम जारी है। टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में कुल 41 आबाद राजस्व गाँव है जिनमें 17 संजय राष्ट्रीय उद्यान एवं 24 दुबरी अभयारण्य में आते हैं।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार टाइगर रिजर्व से गाँव के विस्थापन से बाघ को अपना क्षेत्र स्थापित करने के लिए अधिक जगह मिल जाती है। शाकाहारी प्राणियों के लिये घास मैदान विकसित होने से बाघ का आहार भी बढ़ जाता है। मानव-बाघ द्वंद पर अंकुश लगता है और विस्थापित गाँववासी विकास की मुख्यधारा में जुड़कर रोजगार के नए अवसर पाते हैं। साथ ही उनकी जंगल पर निर्भरता भी खत्म हो जाती है। टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में आदिवासी बाहुल राजस्व गाँव हैं जिनमें मुख्यत: गोंड़, बैगा, कोल, पनिका आदि जन-जातियाँ रहती हैं।

संजय राष्ट्रीय उद्यान के गाँव आगरझिरिया के ग्रामीणों का कलेक्टर के साथ संयुक्त खाता खोला जा रहा है। सात अन्य गाँव करचा, चाफल, सुहिरा, तिनगी, पड़वार, बैगवाँ और मझिगवा के ग्रामीणों के सहमति पत्र, दस्तावेज संकलन, निरीक्षण एवं सर्वेक्षण का कार्य जारी है। रिजर्व कुल 1674.511 वर्ग कि.मी. में फैला है, जिसमें 812.581 वर्ग कि.मी. का कोर और 861.93 वर्ग कि.मी. बफर क्षेत्र शामिल है। कोर क्षेत्र दुबरी अभयारण्य और संजय राष्ट्रीय उद्यान दोनों से मिलकर बना है।

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