नयी दिल्ली,

राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (एनटीपीसी) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक गुरदीप सिंह ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में रायबरेली के ऊंचाहार में निगम के बिजली संयंत्र को जल्दबाजी में शुरू करने से इन्कार करते हुए कहा है कि बायलर में हुआ विस्फोट अनहोनी घटना है जिसकी जांच के लिए समिति गठित की गयी है और वह 30 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंप देगी।

बुधवार को हुए इस भयानक हादसे के संबंध में आज यहां संवाददाता सम्मेलन में श्री सिंह ने कहा कि बायलर में विस्फोट के कारणों का पता लगाने के लिए तथ्य जुटाये जा रहे हैं और उनके एकत्र होने के बाद ही यह ठीक से पता चलेगा कि विस्फोट की मूल वजह क्या थी।

संयंत्र की 500 मेगावाट की यूनिट नंबर छह के बायलर का स्टीम पाइप फटने से हुए इस हादसे में अब तक 33 लोगों की मृत्यु हो चुकी है और 50 से अधिक लोगों का दिल्ली और उत्तर प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। हादसे के बाद ऊर्जा मंत्री राजकुमार सिंह, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा समेत कई नेता संयंत्र का दौरा कर चुके हैं।

श्री सिंह ने विस्फोट को अनहोनी घटना बताया और कहा कि इसके पीछे के कारणों की जांच के लिए वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक एस के राय की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है जो 30 दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट आने से पहले घटना के बारे में कुछ भी कहना अटकलबाजी होगी। उन्होंने कहा कि जो कर्मचारी विस्फोट वाली इकाई में तैनात थे वे काफी अनुभवी थे। ऐसे में हादसा होना बहुत चिंताजनक है।

अध्यक्ष ने बताया कि हादसे में गंभीर रुप से घायल 12 और लोगों को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल लाया जायेगा। घायलों को बेहतर से बेहतर उपचार सुलभ कराने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है।
इससे पहले गंभीर रूप से घायल सात लोगों को लखनऊ से विमान द्वारा सफदरजंग अस्पताल लाया गया।

केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल हादसे में घायल हुए लोगों से मिलने और उनका हालचाल तथा उपचार व्यवस्था की जानकारी लेने के लिए कल रात सफदरजंग अस्पताल गयीं।
श्री सिंह ने हादसे के बाद संयंत्र की सुरक्षा को लेकर खड़े किए जा रहे सवालों को खारिज करते हुए कहा कि यह कहना बिल्कुल गलत है कि संयंत्र को जल्दबाजी में शुरू किया था। उन्होंने कहा कि संयंत्र की शुरुआत पिछले साल दिसम्बर में होने थी जबकि यह इस वर्ष मार्च में शुरू किया गया।

अध्यक्ष ने कहा कि यह कहना बिल्कुल गलत है कि संयंत्र को जल्दबाजी में चालू करने की फिराक में पुख्ता सुरक्षा इंतजाम नहीं किया गए। पूरी सुरक्षा जांच के बाद ही संयंत्र चालू किया गया था। संयंत्र जिन इंजीनियरों की देखरेख में था उन्हें 25 से 30 साल तक का अनुभव था।

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