मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने जनहित व कल्याणकारी सरकार की व्याख्या में यह बहुत बड़ा और मानवीय कदम उठाया है कि राज्य से शासकीय सेवाओं में संविदा पर भर्ती करने की व्यवस्था समाप्त की जा रही है. उन्होंने स्वयं ही इसे बहुत ही अन्यायपूर्ण बताया. इसके सबसे ज्यादा भुक्तभोगी शिक्षक वर्ग है, जिसका संविदा प्रणाली में भारी शोषण हो रहा है.

इससे पहले राज्य में दैनिक वेतन भोगी व्यवस्था भी बहुत ही अन्यायपूर्ण थी. बरसों तक और कई रिटायर होने तक दैनिक वेतनभोगी ही बने रहते थे जिन्हें फंड, छुट्टी , पेंशन आदि की कोई सुविधा नहीं थी. इसे श्री चौहान सरकार ने खत्म कर बड़ा कदम उठाया और अब संविदा के नाम व व्यवस्था को भी मिटाया जा रहा है.

इसी तरह मानदेयी कर्मचारियों के नाम पर आंगनबाड़ी संस्थाओं के कर्मचारियों का भारी शोषण हो रहा है. मुख्यमंत्री ने इस दिशा में भी संकेतों में बहुत कुछ कह दिया है और आशा की जाती है कि आंगनबाडिय़ों के कर्मचारी भी मानदेय के शोषण से मुक्त कर वेतन पाने वाले सरकारी कर्मचारी बन जायेंगे.

हाल ही में तीन बड़े आयोजन होंगे- सहकारी सम्मेलन, संविदा कर्मियों का सम्मेलन और 8 अप्रैल को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का सम्मेलन होगा और मध्यप्रदेश में कर्मचारियों का सुखद अध्याय प्रारंभ होगा.

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