वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गुजरात चुनाव के दौरान भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह के बारे में की गई कुछ टिप्पणियों को लेकर संसद में विपक्ष की कांग्रेस द्वारा प्रतिकार व माफी मांगने की मांग पर चला आ रहा गतिरोध समाप्त हो गया.

संसद में किसी न किसी बात पर या कोई मुद्दा उठाकर गतिरोध होते रहना विपक्ष का चलन हो गया है. इसकी शुरुआत भारतीय जनता पार्टी द्वारा ही उन 10 सालों के दौरान की गई जब कांग्रेस नेतृत्व यू.पी.ए. की सरकारें लगातार दो टर्म में कायम रही. उस समय कांग्रेस ने यू.पी.ए. बनाकर भाजपा नेतृत्व की अटलबिहारी वाजपेयी की एन.डी.ए. सरकार को एक टर्म के बाद ही हराकर सत्ता वापस ले ली थी.

यू.पी.ए. के शासन काल में स्पेक्ट्रम और कोल ब्लाक आवंटनों पर भारतीय जनता पार्टी ने लगातार संसदीय गतिरोध बनाये, इसमें संसद का पूरा सत्र ही गतिरोध में बिल्कुल बेकार चला गया था. अब यह एक परम्परा भी बन गई है कि संसद चलेगी कम और गतिरोध में ज्यादा रहेगी.

अब कांग्रेस विपक्ष में बैठकर भाजपा को उसकी ही तरह गतिरोध से जवाब दे रही है और अब भारतीय जनता पार्टी की सरकार बार-बार यह प्रार्थना कर रही है कि संसद का गतिरोध न करे. सरकार चर्चा के लिए तैयार है. यही प्रार्थना कांग्रेस की यू.पी.ए. सरकार भी करती रही, लेकिन विपक्ष की भाजपा उसे मानती नहीं थी.

गुजरात चुनाव के दौरान श्री मणिशंकर अय्यर ने दिल्ली किसी निजी काम से आये पाकिस्तान के भूतपूर्व प्रधानमंत्री को डिनर पर बुलाया. इसमें श्री मनमोहन सिंह, भूतपूर्व उपराष्टपति श्री हामिद अंसारी व भूतपूर्व सेना प्रमुख श्री दीपक भी शामिल हुए.

बकौल श्री अय्यर व मनमोहन सिंह के यह डिनर पार्टी एक सामान्य शिष्टाचार थी. भारत-पाक संबंधों पर सामान्य बातें होती रहीं. यह मुलाकात गोपनीय भी नहीं और न ही यह अनुचित थी.

गुजरात चुनाव प्रचार के दौरान श्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस नेताओं की पाकिस्तान नेताओं के साथ डिनर पार्टी को आलोचना व्यंग-कटाक्ष की तरह इस्तेमाल किया कि यह मुलाकात क्यों हुई थी. क्या अहमद पटेल को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाना तय किया है. उसी समय पाकिस्तान सरकार की तरफ से यह कहा गया कि गुजरात चुनाव से उसका कुछ लेना-देना नहीं है.

इसी बात को कांग्रेस ने इस तरह से लिया कि जैसे श्री मोदी ने श्री मनमोहन सिंह की राष्ट्र के प्रति निष्ठा पर संदेह किया है. उन्होंने इस पर श्री मोदी से माफी की मांग की और इसी पर संसद में गतिरोध हो गया. चुनाव के समय श्री मणिशंकर अय्यर ने श्री मोदी को ‘नीच’ कह दिया.

हर चुनाव में कुछ न कुछ अति-अतिरेक होता ही है. राज्यसभा के सभापति श्री वैंकेया नायडू ने कहा कि जो बात संसद में कही नहीं गयी उस पर संसद में माफी मांगने की बात ही नहीं उठायी जा सकती.

अंततोगत्वा राज्यसभा में केंद्रीय वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने कहा कि श्री मोदी ने श्री मनमोहन सिंह की राष्ट्र के प्रति निष्ठा पर कोई संदेह नहीं किया है. हम सब श्री सिंह का पूरा सम्मान करते हैं.

कांग्रेस की ओर से श्री गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कांग्रेस किसी ऐसी बात का समर्थन नहीं करती और उसे गलत मानती है, जो प्रधानमंत्री की गरिमा के विरुद्ध हो. श्री आजाद की यह टिप्पणी श्री मणिशंकर अय्यर की उस टिप्पणी के संदर्भ में थी जिसमें श्री मोदी को नीच कहा गया था.इन दोनों नेताओं के बयानों के बाद गतिरोध का मुद्दा खत्म माना गया. ‘अन्त भला-सो सब भला’ की सुखद स्थिति बन गई है.

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