जनवरी 29 को राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ ही संसद का बजट सत्र प्रारंभ हो गया. अगले तीसरे दिन 1 फरवरी को केंद्रीय वित्तमंत्री श्री अरूण जेटली मोदी सरकार के पांच साल के कार्यकाल का आखरी बजट प्रस्तुत होगा. 2019 में लोकसभा के आम चुनाव आ रहे हैं. बजट पूर्व ही प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने संकेत दिया है कि बजट जनआकांक्षाओं के अनुरूप होगा.

राष्ट्रपति श्री राजनाथ कोविन्द ने अपने भाषण में परंपरागत रूप में सरकार की विकास योजनाओं का उल्लेख करते हुए वे आंकड़े भी प्रस्तुत किये जो उन योजनाओं के तहत प्राप्त किये गये हैं.

उन्होंने प्रारंभ में ही इस बात का विशेष उल्लेख किया कि इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह में पहली बार एक साथ इतने राष्ट्राध्यक्षो ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया. यह निश्चित ही मोदी सरकार राष्ट्र सम्मान व राजनैतिक शक्ति और असियान देशों की एकता का प्रतीक बना.

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार मुस्लिम महिलाओं के संदर्भ में तीन तलाक के विरुद्ध संसद में विधेयक पेश कर चुकी है और यह उन्हें सौगात के रूप में दिया जा रहा है. पहली बार भारत से 1300 मुस्लिम महिलाएं बिना किसी पुरुष को साथ लिये स्वयं ही हज यात्रा पर जा रही हैं.

गरीब महिलाएं सदियों से रसोई में धुएं से त्रस्त रहती आयी हैं उन्हें उज्जवला योजना के तहत अब तक 3 करोड़ 30 लाख ऐसी महिलाओं को एल.पी.जी. कनेक्शन दिये जा चुके हैं. मातृत्व प्राप्त करने पर महिलाओं को 12 के स्थान पर 26 सप्ताह की सवैतनिक अवकाश दिया जायेगा. जन धन योजना में 31 करोड़ गरीबों के बैंक खाते खोले जा चुके हैं.

किसानों की हालत स्थिर हो रही है. देश में सब्जियों का उत्पादन दुगना हो गया है. दालों के उत्पादन में 38 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. यूरिया में नीम की कोटिंग… से उसकी कालाबाजारी रुकी है और देश में यूरिया का उत्पादन भी बढ़ा है. श्री कोविन्द ने कहा है कि यह बहुत बड़ी किसान हित की उपलब्धि है कि उन्हें मात्र 90 पैसे में फसल बीमा दिया जा रहा है. एक करोड़ गरीब घरों में बिजली कनेक्शन दिये गये हैं.

अटल पेंशन योजना 80 लाख वृद्धजनों को दी जा रही है. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा नीति से 82 प्रतिशत लोगों को लाभ मिल रहा है. दिव्यांगों को नौकरी में 4 प्रतिशत और शिक्षा में 5 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है.

नीतिगत मामलों में श्री कोविन्द ने कहा कि उनकी सरकार तुष्टिकरण की नहीं बल्कि सशक्तिकरण पर चल रही है. राष्ट्रपति ने इस बात पर काफी जोर दिया कि देश मेेंं राजनैतिक सहमति बनायी जाए कि लोकसभा व विधानसभाओं के चुनाव एक साथ हों. अलग-अलग चुनावों से विकास बाधित होता है. बिना सामाजिक और आर्थिक प्रजातंत्र के देश में राजनैतिक प्रजातंत्र चल नहीं सकता.

शौचालय अभियान से देश में महिलाओं को सामाजिक न्याय व सम्मान मिला है. यह आंदोलन दिनोंदिन बढ़ता ही जा रहा है. पिछड़ी जातियों के नेशनल कमीशन को संवैधानिक दर्जा दिया जा रहा है. नये भारत की भावना किसी राजनैतिक दल में नहीं बल्कि पूरे 130 करोड़ देशवासियों में निहित है.

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