लम्बे अर्से तक यही चलता रहा कि संसद का सत्र आहूत होता था और कार्यक्रम के अनुसार चलकर सम्पन्न होता था. लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने जब वह सत्ता हार विपक्ष में आयी तो उसने संसदीय व्यवस्था को अवरोधों से अस्त-व्यस्त कर दिया. अब जब वह फिर से सत्ता में आयी है तो वही सब उसके सामने आ रहा है जो उसी ने विपक्ष में बैठकर शुरु किया था.

भारतीय जनता पार्टी की प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की एन.डी.ए. सरकार पांच साल चलकर अगले चुनाव में कांग्रेस नेतृत्व के यू.पी.ए. से हार गयी और इसके बाद भी दूसरा चुनाव भी श्री लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में भी यू.पी.ए. से पुन: हार गयी.

पार्टी के हौसले पस्त थे और उसने अपनी सामथ्र्य संसद में अवरोधों के मार्फत से चलायी. हर सत्र में कभी यह कभी वह मसले को मुद्दा बनाकर संसद का अवरोध करती रही. यू.पी.ए. सरकार से यही कहा जाता रहा कि वह हर मसले पर चर्चा को तैयार है- संसद चलने दी जाए. कई राष्टï्रीय महत्व के विधेयक रुके पड़े हैं. उन्हें पारित करना है, लेकिन विपक्ष में बैठी भारतीय जनता पार्टी अवरोध की रणनीति पर ही चलती रही. एक समय पूरा मानसून सत्र ही अवरोधों के कारण बेकार चला गया. इसका दुष्परिणाम यह भी हुआ कि राज्यों की विधानसभाओं जिसमें मध्यप्रदेश विधानसभा भी है, वहां भी विपक्ष, जो कांग्रेस के पास है, वह भी अवरोधों की प्रणाली चलाने लगा.

यह भारतीय संसदीय प्रणाली में बड़ी ही घातक कुप्रथा, कुरीति आ गयी है कि संसद-विधानसभाओं में काम नहीं हो रहा है. अब वहां मुख्य काम अवरोध ही हो गया है.

26 नवम्बर से संसद का शरद सत्र प्रारंभ हो रहा है. उससे एक दिन पहले दिन भर मोदी सरकार का सत्ता पक्ष और सम्पूर्ण विपक्ष के बीच स्पीकर द्वारा बुलायी गयी सर्वदलीय बैठक के अलावा अन्य राजनैतिक वार्ताओं के दौर चले कि विपक्ष अवरोध न करे और संसदीय काम चलने दें.

एक विचित्र स्थिति आ गयी है कि जीएसटी विधेयक यूपीए सरकार ने बनाया और संसद में पेश किया था. उस पर राज्यों में सहमति बनाना थी. उसमें काफी अड़चन आई. भाजपा की शिवराज सिंह चौहान सरकार की भी सहमति नहीं मिल रही थी. संसद में विपक्ष में बैठी भाजपा भी उसका विरोध कर रही थी. अवरोधों में वह विधेयक पारित न हो सका और अब वह मोदी सरकार को पारित कराना या उसे खत्म करना है. लेकिन श्री मोदी सरकार भी इस जीएसटी विधेयक को पारित कराने के लिये उतनी ही आतुर हैं जितनी इनकी मूल प्रणेता कांग्रेस-यूपीए थी.

अब मोदी सरकार विपक्ष में बैठी कांग्रेस व अन्य विपक्षी पार्टियों से चिरोरी विनती कर रही है कि जीएसटी विधेयक पारित होने दें. अन्य राष्टï्रीय महत्व के विधेयक लम्बित पड़े हैं. संसद सत्र चलने दिया जाए. साथ जो उससे पहले कहा जा चुका है अब वह कह रही है कि वह उस विषय पर चर्चा को तैयार है.

संसदीय अवरोधों का ढर्रा वही है केवल पक्ष, विपक्ष और विपक्ष अब पक्ष हो गया है. मुद्दा वही है.

मध्यप्रदेश में रतलाम सीट से भारतीय जनता पार्टी का हारना उसे आहत कर रहा है. लोकसभा के आम चुनाव की जीत के बाद लोकसभा के उपचुनाव में वह उसकी पहली और करारी हार है. उसका मनोबल गिरा हुआ है और कांग्रेस का मनोबल बढ़ा है. संसद चलेगी या अवरोध से सत्र समाप्त होगा- यह अभी निश्चित नहीं है. देखें क्या होता है.